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भुमिहीन लोग भी उगा सकेंगे हरी सब्जियां

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शहर में अर्बन फॉर्मिंग को बढ़ावा देने के लिए कम्पोस्ट तैयार करते कृषि विभाग के कर्मचारी। संवाद। - फोटो : KATHUA
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कठुआ। खेती का नाम सामने आते ही लोगों की जुबां पर लंबे चौड़े खेत, ट्रैक्टर और खाद बीज का ख्याल मन में आने लगता है, लेकिन अब खेती का तरीका बदल रहा है। गांवों से निकलकर लोग शहरों का रुख कर रहे हैं। इससे गांवों में खेती का रकबा कम हो रहा है। गांव में रहने वाले किसान रासायनिक खादों का प्रयोग कर फसल तैयार कर रहे हैं, इसका असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है।
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ऐसे में अब कृषि विभाग नए प्रयोगों के साथ शहरों में खेती को बढ़ावा देने की योजना पर काम कर रहा है। विदेशों की तर्ज पर अब कठुआ जिले में भी अर्बन फार्मिंग के कंसेप्ट को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए कृषि विभाग ने कमर कस ली है। जिले में कृषि विभाग फ्लैगशिप कार्यक्रम के तौर पर शहर के भूमिहीन और शौकिया तौर पर सब्जियां उगाने वालों के लिए अर्बन फार्मिंग की प्रोत्साहन योजना लेकर आया है। वो दिन दूर नहीं जब शहर के कई घरों की छतों पर जैविक तरीके से तैयार सब्जियां और फल लगे दिखाई देंगे। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार आज के समय में शहरों में खेती करना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। क्योंकि जगह-जगह मॉल, हॉस्पिटल, स्कूल और बड़ी बड़ी इमारतें बन रहें है। ऐसे में जगह की कमी के बीच हरियाली और स्वस्थ जीवन शैली के प्रति लोगों का रुझान बढ़ाया जाना बेहद जरूरी है जिसमें अर्बन फार्मिंग एक बेहतरीन विकल्प बन सकता है। टेरेस गार्डन पर टमाटर, भिंडी, बैंगन, धनिया, पुदीना, पालक, लौकी, करेला आदि कई सब्जियां आसानी से उगाई जा सकती है।
शहरी खेती को बढ़ावा देने के लिए विभाग अपने स्तर पर एक प्रयोग करने जा रहा है। पहले चरण में कठुआ शहर में चिह्नित लोगों को प्रायोगिक तौर पर विभाग की ओर से तैयार अर्बन फार्मिंग के बैग उपलब्ध करवाए जाएंगे। खेती के प्रति रुची रखने और जमीन से वंचित लोगों के लिए यह एक वरदान साबित हो सकता है।
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विजय कुमार उपाध्याय
मुख्य कृषि अधिकारी कठुआ
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