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Kathua News: परिवार सहित 5 हजार मिड-डे मील वर्कर चुनाव का करेंगी बहिष्कार

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-भारी बारिश में फूटा मिड-डे मील वर्करों का गुस्सा, जिला उपायुक्त कार्यालय के बाहर की नारेबाजी
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- मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर संघर्ष कर रही मिड-डे मील वर्करों ने जताया रोष
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। मानदेय वृद्धि की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे मिड-डे मील वर्करों ने सोमवार को भारी बरसात के बीच जिला उपायुक्त कार्यालय के समक्ष रोष प्रदर्शन किया। इस दौरान मिड डे मील वर्करों ने कहा कि अगर मानदेय नहीं बढ़ाया गया तो परिवार सहित 5 हजार मिड डे मील वर्कर आगामी चुनाव का बहिष्कार करेंगे। इस दौरान उपायुक्त को मांग पत्र सौंप केंद्र सरकार तक अपनी मांगे पहुंचाने की मांग रखी।
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मिड-डे मील वर्करों में शामिल वक्ताओं ने कहा कि एक महीने के काम के एवज में उन्हें मात्र एक हजार रुपये दिए जाते हैं। कई साल से मानयदेय बढ़ाया नहीं गया है, जबकि महंगाई रोज बढ़ती जा रही है। ऐसे में एक हजार रुपये में गुजारा करने की स्थिति नहीं है। मौजूदा समय को देखते हुए कम से कम 10 हजार रुपये मानदेय किया जाए। उन्होंने कहा कि अधिकारी डेढ़ लाख वेतन लेकर अपने दफ्तरों में बैठ आदेश जारी कर देते हैं। लेकिन मिड-डे मील वर्करों को अपना वेतन बढ़वाने के लिए सड़कों पर निकलना पड़ रहा है। मोदी सरकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा तो देती है लेकिन उन्हीं के राज में बेटियों को सड़कों पर धक्के खाने पड़ रहे हैं। शायद सरकार को पता नहीं है कि आटा, चावल, दाल, चीनी, रसोई गैस जैसी चीजें घर चलाने के लिए आवश्यक हैं। उनका मौजूदा समय में क्या भाव है। नियमित होने की आस में लगी वर्करों को स्कूलों में काम करते हुए दस-दस साल बीत चुके हैं। अब भी अगर सरकार उनके वेतन में वृद्धि न की तो 5 हजार मिड-डे मील वर्कर आगामी चुनाव का परिवार सहित बहिष्कार करेंगी और चुनाव प्रक्रिया में वह और उनके परिवार वोट नहीं डालेंगे। मिड-डे मील वर्कर निशा देवी ने कहा कि उन्हें स्कूल के सभी बच्चों को समय पर भोजन उपलब्ध करवाने के लिए सुबह आठ बजे ही स्कूल पहुंचना पड़ता है। भोजन तैयार करने के बाद सभी विद्यार्थियों को भोजन करवाने और साफ-सफाई की जिम्मेदारी पूरी करने में दोपहर हो जाती है। वह सुबह सबसे पहले स्कूल पहुंचती हैं और स्कूल बंद होने पर सबसे बाद में अपने घर जा पाती हैं। इतनी सेवा के बदले में उन्हें जो मानदेय दिया जा रहा है पर्याप्त नहीं है। उन्होंने सरकार से मिड-डे मील वर्करों को दिए जाने वाले मानदेय की समीक्षा किए जाने की मांग की।
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