वार्ड में श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने के लिए उमड़े श्रद्धालु। संवाद
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कठुआ। शहर के वार्ड 8 में विगत एक सप्ताह से जारी श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ संपन्न हो गया है। रविवार को कथा के अंतिम दिन कथा व्यास महेश दास शास्त्री ने उपस्थित श्रद्धालुओं को मोह माया को त्याग कर भगवान के परमधाम का अधिकारी बनने के लिए उनके श्री चरणों का ध्यान करने की शिक्षा दी। वही इसके उपरांत निकाली गई कलश यात्रा विसर्जन शोभायात्रा के बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें हजारों भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया।
अपने प्रवचन के दौरान कथा व्यास ने उपस्थित श्रद्धालु को बताया कि श्रीमद्भागवत कथा के कारण राजा परीक्षित का राज तथा परिवार से मोह समाप्त हो गया। उन्होंने बताया कि श्रीमद्भागवत पुराण एक ऐसा ग्रंथ है, जिसको श्रवण मात्र से मनुष्य मोह माया और लोभ से दूर होता है और उसे भगवान का परमधाम प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि तक्षक सर्प के डसने से राजा परीक्षित को कथा के दौरान ही की मृत्यु हो गई। परंतु कथा सुनने से राजा परीक्षित का ध्यान संसार से हटकर स्वर्ग के सुख में लीन था। राजा के पद पर रहते हुए उन्होंने बड़े-बड़े धर्म यज्ञ किए थे। परमात्मा का विधान है कि जो अंत समय में जिसका स्मरण करता है वह उसी को प्राप्त होता है। इसी विधान के अनुसार राजा परीक्षित का स्थूल शरीर जो सर्प विष के कारण मर गया था अपने सूक्ष्म शरीर युक्त होकर सुकदेव ऋषि के साथ विमान में बैठकर स्वर्ग चला गया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत पुराण के श्रवण से हमारे जन्म जन्मांतर के पापों का नाश होता है और ज्ञान चक्षु खुल जाते हैं। जो कि हमें सांसारिक मोह माया से मुक्त करने में सहयोग करते हैं। लिहाजा हमें भागवत कथा का श्रवण पूरी निष्ठा और ध्यान से करना चाहिए। ताकि हमारे जीवन की कठिनाइयों का नाश हो और परमधाम में भगवान श्री हरि के चरणों में वास मिल सके। अंत में कथा सुनने आए सैकड़ों हरि भक्तों ने सामूहिक आरती में भाग लिया और प्रसाद वितरित किया गया।