कठुआ। अगले सप्ताह से एनएचपीसी संचालित सेवा दो जलविद्युत परियोजना की टरबाइन फिर से घूमने लगेगी। मंगलवार से सेवा परियोजना के जलाशय में बांध प्रबंधन की ओर से पानी को रोकने की तैयारी कर ली गई है। अगले तीन से चार दिन में परियोजना की हेडरेस टनल तैयार करने के लिए बनाई गई लिंक टनल को भरने का काम पूरा कर लिया जाएगा। जिसके बाद एचआरटी में पानी छोड़कर जांच करने के साथ ही टरबाइनों को घुमा दिया जाएगा। जलाशय में जलभराव की प्रक्रिया भी अगले चार दिन में पूरी कर ली जाएगी। इन दिनों पहाड़ों पर हुई भारी बर्फबारी के बीच मौसम खुलने से बर्फ पिघलने का सिलसिला भी जारी है। ऐसे में परियोजना के जलाशय को भरने में भी मदद मिलने वाली है। प्रदेश को एक बार फिर अपने हिस्से की 23 मेगावाट बिजली की आपूर्ति इसी माह से सुनिश्चित होने जा रही है।
दरअसल, सितंबर 2020 में हेड रेस टनल के क्षतिग्रस्त होने से 120 मेगावाट क्षमता की सेवा जलविद्युत परियोजना में बिजली उत्पादन ठप हो गया था। 50 करोड़ की लागत से एचआरटी के क्षतिग्रस्त हिस्सों को पूरा किया गया है। नई एलाइनमेंट में 720 मीटर टनल को खोदकर एचआरटी तैयार की गई हैं। परियोजना के महाप्रबंधक सुप्रकाश अधिकारी ने बताया कि टनल धंसने के बाद नई एलाइनमेंट तैयार कर ली गई है। बताया कि अगले एक सप्ताह के भीतर सेवा जलविद्युत परियोजना में बिजली उत्पादन फिर से शुरू करने की तैयारी है। पहले चरण में परियोजना को पीक समय पर चलाया जाएगा जिसके लिए मंगलवार से जलाशय को भरने का काम शुरू कर दिया जाएगा। बताया कि लगभग एक साल और साढ़े चार महीने बाद परियोजना को फिर से चालू कर दिया जाएगा।
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परियोजना न चलने से 500 करोड़ का घाटा- गर्मी के सीजन में पीक लोड पर मिलेगी बिजली
हेड रेस टनल की नई एलाइनमेंट को लेकर जहां तेजी से सेवा परियोजना में काम जारी है। वहीं, लगभग डेढ़ साल से बंद रही इस परियोजना के चलते लगभग 272 करोड़ की बिजली का उत्पादन नहीं हो सका। परियोजना में बिजली उत्पादन ठप रहने से हुए नुकसान के अतिरिक्त टनल को फिर से तैयार करने में आया खर्च अतिरिक्त है। बिजली उत्पादन ठप रहने से गर्मियों में जिले में बिजली संकट भी बढ़ गया यहां तक कि सर्दियों में पीक समय पर अधिक कटौती की वजह सेवा परियोजना से बिजली आपूर्ती ठप होना भी रहा है। 120 मेगावाट की सेवा परियोजना के ठप होने से कई अन्य राज्यों में बिजली संकट गहराया हुआ है। जम्मू-कश्मीर को इस परियोजना से 23 मेगावाट बिजली उत्पादन की कमी का सामना करना पड़ रहा है। अधिक नुकसान कठुआ जिले को झेलना पड़ता है जहां गर्मी में सेवा परियोजना से बिजली हासिल की जाती रही है। टैरिफ के अनुसार औसतन सेवा दो जलविद्युत परियोजना 75 लाख रुपये की बिजली पैदा करती रही है। पानी अधिक उपलब्ध होने पर बिजली उत्पादन प्रतिदिन एक करोड़ तक पहुंच जाता है। औसत के अनुसार परियोजना ठप रहने से 500 करोड़ का नुकसान झेलना पड़ा है।
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25 सितंबर 2020 को भूस्खलन से हुआ था नुकसान
पिछले साल 25 सितंबर को भूस्खलन के चलते सेवा परियोजना की हेड रेस टनल में से पानी का बहाव सेवा नदी की तरफ हो गया था। सुरंग के एडिट-दो में तैनात एनएचपीसी कार्मिक एवं स्थानीय निवासियों की सूचना पर अधिकारियों ने घटनास्थल का जायजा लिया। प्रभावित स्थल के आसपास के निवासियों को भी नुकसान वाली जगह से दूर रहने को कहा गया। 26 सितंबर को परियोजना के तत्कालीन महाप्रबंधक बेदी राम ने वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम के साथ घटनास्थल का जायजा लिया, जिसमें पाया कि एडिट-दो से बांध परिसर की तरफ तीन सौ से चार सौ मीटर तक के स्थान के पास सेवा-दो पावर स्टेशन की हेड रेस टनल का बड़ा हिस्सा बह चुका है। यह मामला एनएचपीसी से संबंधित अधिकारियों के संज्ञान में लाया गया और मुख्यालय से इंजीनियरिंग भूविज्ञान, डिजाइन व इंजीनियरिंग, संचालन एवं रखरखाव और परियोजना जांच प्रभागों के विशेषज्ञों की एक टीम घटना के अगले दिन मौके पर पहुंची। इसके बाद से आंकलन जारी है। एनएचपीसी के अधिकारियों ने बताया कि टनल का लगभग सौ मीटर हिस्सा बह चुका है। इसके परिणामस्वरूप, पावर स्टेशन को बंद करना पड़ेगा। इसके बाद जलाशय को भी खाली कर दिया गया। तब से यह परियोजना ठप पड़ी हुई है।
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इस परियोजना से किस प्रदेश को कितनी मिलती है बिजली
प्रदेश/राज्य बिजली शेयर (मेगावाट में)
हरियाणा 7
जम्मू कश्मीर 23
पंजाब 10
राजस्थान 13
उत्तर प्रदेश 27
उत्तराखंड 5
चंडीगढ़ 1
दिल्ली 16
अन एलोकेटिड 18
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कुल 120