कठुआ। विशेष मोबाइल मजिस्ट्रेट ने बेटी की कॉलेज की पढ़ाई के लिए पिता से भरण पोषण की मांग को खारिज कर दिया है। आदेश के अनुसार बीएनएस की धारा 144 के अनुसार पिता को नाबालिग बच्चों का भरण-पोषण करना अनिवार्य है। बालिग अविवाहित बेटी को भरण-पोषण केवल तभी मिल सकता है जब वह किसी शारीरिक या मानसिक अक्षमता के कारण स्वयं का पालन-पोषण करने में असमर्थ हो।
अदालत ने कहा कि क्योंकि बेटी अब बालिग हो चुकी है और उसने ऐसी कोई अक्षमता साबित नहीं की है जिसके आधार पर उसका भरण-पोषण उसके पिता द्वारा किया जाए। इसके बाद कोर्ट ने याचिका को अस्वीकृत कर मामले को निराधार बताया है। कोर्ट में दायर याचिका के अनुसार याचिकाकर्ता युवती ने 8 जुलाई 2024 को कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इसमें याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि उसका जन्म 16 फरवरी 2007 को हुआ था। उसके पिता पुलिस में कांस्टेबल हैं और महीने का 60 हजार रुपये कमाते हैं। याचिकाकर्ता के मुताबिक उसकी मां की मौत 14 जुलाई 2012 को हो गई थी। इसके बाद उसकी परवरिश उसकी नानी ने की। केवल नानी ने ही उसकी शिक्षा-दीक्षा का पूरा खर्च उठाया है। वह वित्तीय वर्ष 2023-24 में 12वीं कक्षा उत्तीर्ण कर चुकी है और उसकी नानी अब आगे की पढ़ाई के लिए खर्च उठाने में सक्षम नहीं है। याचिका कर्ता ने बताया कि उसके पिता कभी उससे मिलने या उसकी देखभाल करने की कोशिश नहीं की और न ही कोई आर्थिक सहायता दी।
लिहाजा कोर्ट से 30 हजार रुपये प्रति महीने भरण-पोषण की मांग की गई। अदालत के नोटिस जारी करने के बाद भी पिता अदालत में पेश नहीं हुए। इसके बाद मामले को एक्स-पार्टी करार दिया गया।