कठुआ। जिले में किसानों की सुविधा के खोली गई धान खरीद मंडियों को बिना किसी पूर्व सूचना के बंद किए जाने से किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। वीरवार को जखबड़ गांव में मंडी बंद होने पर स्थानीय किसानों ने सरकार कृषि विभाग और भारतीय खाद्य निगम के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए अपने गुस्से का इजहार किया और सरकारी खरीद दोबारा से शुरू करने की मांग की।
प्रदर्शनकारी किसानों का नेतृत्व कर रहे जखबड़ गांव के सरंपच अजय शर्मा ने बताया कि उनके गांव में किसानों की सुविधा के नाम पर खरीद मंडी तो खोली गई, लेकिन काफी कम स्थान वाली जगह पर खोली गई। मंडी में शुरू से सुुविधाओं का अभाव बना रहा है। मंडी में न तो पर्याप्त मजदूरों की व्यवस्था थी और न ही किसानों की ओर से लाए जाने वाले धान को रखने के लिए पर्याप्त स्थान था, जिसके कारण मंडी में खरीद की गति काफी कम रही है। जिसका नतीजा यह रहा है कि अभी भी इलाके में 50 प्रतिशत किसानों का धान खरीदा नही जा सका है। ऊपर से गत 30 नवंबर को बिना किसी पूर्व सूचना के मंडी को बंद कर दिया गया है। मंडी में किसानों की ओर से लाया गया धान खुले में पड़ा है और मौसम भी खराब है, ऐसे में किसान अपनी फसल को कैसे बचाए? क्योंकि अब तो न यहां कृषि विभाग के अधिकारी और न ही एफसीआई के अधिकारी आ रहे हैं। मगर अचानक से सरकार की ओर से खरीद पर रोक लगाए जाने से किसानों को बड़ा झटका लगा है।
वहीं प्रदर्शन में शामिल किसान रामेश्वर शर्मा का कहना है कि उन्होंने मंडी में अपना धान गत 19 नवंबर को पहुंचा दिया था। लेकिन मंडी में र्प्याप्त स्थान न होने के कारण उनका धान खरीदा नही जा सका है। वहीं मौसम का बिगड़ा हुआ मिजाज देखकर लगता है कि सरकारी खरीद बंद होने से उनकी फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य के बजाए प्राइवेट हाथों में औने-पौने दामों में ही बेचना पड़ेगा। क्योंकि पहले भी मौसम की मार के कारण किसानों को नुकसान उठाना पड़ा था अब अगर एक बारिश और हो गई तो पूरी फसल मिट्टी में तब्दील हो जाएगी।
प्रदर्शन में सोम राज, शक्ति कुमार, पंकज शर्मा, पुरुषोत्तम सिंह, कुक्कू सिंह आदि किसान शामिल रहे।
----------------------
जिला में गत वर्ष हुई 2 लाख 41 हजार कुंतल रिकार्ड धान खरीद के बाद इस साल इस रिकार्ड के टूटने की उम्मीद कृषि विभाग के जताई थी। लेकिन अक्टूबर माह से खुले धान खरीद केंद्रों में अब तक दो लाख कुंतल धान खरीदा जा सका है। अभी किसानों के पास हजारों कुंतल धान पड़ा भी हुआ है। मगर अब सरकारी खरीद पर खरीद बंद होने के कारण उक्त लक्ष्य पार होने की संभावना खत्म हो जाएगी और किसानों को इसका नुकसान उठाना पड़ेगा।
----------------------------------
सरकार के आदेश के मुताबित हर साल 30 नवंबर तक ही मंडियों को चलाने की अनुमति होती है। लेकिन हर साल किसानों मांग को देखते हुए सरकार द्वारा इसे बढ़ा दिया जाता है। इस बार में भी किसान की मांग सरकार तक पहुंचाई गई है। उम्मीद है कि खरीद को जारी रखने के आदेश मिल जाएंगे।
विजय कुमार उपाध्याय,
जिला मुख्य कृषि अधिकारी।