उज्ज दरिया के उफान ने इस बार भी कई जिंदगियों को आफत में डाल दिया। दरिया में बाढ़ का पैमाना एक लाखा 60 हजार क्यूसेक को पार कर गया जिसके बाद दरिया किनारे तबाही के मंजर दिखाई दिए। जिले के पहाड़ी इलाकों में चौबीस घंटे के भीतर भारी बारिश से मैदानी इलाकों में उज्ज ने अपना कहर बरपाया है। जिसके निशान जलस्तर कम होने पर बुधवार को देखने को मिले।
बाढ़ नियंत्रण विभाग को जुलाई महीने में ही अबतक 31 करोड़ से अधिक के नुकसान की जानकारी है। मंगलवार की बाढ़ में 21 करोड़ के बाढ़ नियंत्रण के इंतजाम बह गए। उधर, उज्ज से सटे चंग, छब्बे चक, तंगदेवपुरा, सलालपुर, कोटपुन्नू, माही चक, घाटी के इलाकों में लगभग 65 हेक्टेयर के लगभग जमीन अब खड्ड में बदल चुकी है।
पहाड़ी इलाकों में मक्की की लगभग छह हेक्टेयर में लगी फसल भारी बारिश से तबाह हुई है। यह नुकसान लोआंग, दौल्का, संदरूण, नजाते, बनी और मछेडी में हुआ है। उधर, अमुआला में 88 कनाल, देवल में दस कनाल और धमलाड़ में सात कनाल जमीन पर लगी मक्की की फसल तबाह हुई है।
जम्मू-पठानकोट नेशनल हाईवे पर सहार खड्ड के खडेरू-एक पुल के तीन पिल्लर तक पानी कटाव कर पहुंच चुका है। बारिश जारी रहने पर पुल के धंसने का खतरा था जिसके देखते हुए पुल के आधे हिस्से पर ट्रैफिक डायवर्ट कर दी गई है। एंबुलेंस तैनात करने के साथ ही हादसों को रोकने के लिए पुल पर ब्लिंकर लगा दिए गए हैं। डीसी कठुआ राहुल यादव ने बताया कि उज्ज के साथ साथ तरनाह के हिस्सों में नुकसान हुआ है।