विवादों के साथ शुरू हुई घाटी औद्योगिक क्षेत्र परियोजना के विकास के लिए केंद्र सरकार से राशि नहीं आई है। ऐसे में अब क्षेत्र के विकास के साथ परियोजना पर भी ब्रेक लग गया है।
परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण हो चुका है लेकिन अभी तक वहां पर कोई भी फैक्ट्री अथवा औद्योगिक इकाई स्थापित नहीं हो पाई है।
इसके पीछे पर्यावरण नियमों को ध्यान में रखे जाने का हवाला दिया जाता है। इसके लिए केंद्र सरकार को 60 करोड़ की राशि देनी है लेकिन अभी तक सरकार द्वारा राशि नहीं भेजी गई है।
इसके कारण पर्यावरण बचाव के लिए जो मानक स्थापित किए गए उन्हें पूरा नहीं किया गया है। उन मानकों के पूरा न होने के कारण वहां पर अभी तक कोई निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है।
ऐसे में किसानों का रोष बढ़ता जा रहा है। उल्लेखनीय है कि स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कारपोरेशन (सिडको) के अधीन निर्माणाधीन घाटी औद्योगिक क्षेत्र के लिए साढ़े तीन हजार कनाल की भूमि पर सैकड़ों किसान खेती करते थे।
रोशनी एक्ट के तहत भूमि अधिग्रहण होने के बाद भूमि पर न तो खेती हो रही है और न ही औद्योगिक इकाइयों का निर्माण हो रहा है।