संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। जिला मुख्यालय से करीब 12 किलोमीटर दूर ऐतिहासिक कस्बा नगरी में स्थित माता बाला सुंदरी मंदिर स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ पड़ोसी राज्य पंजाब के भक्तों की भी गहरी आस्था का केंद्र है। शारदीय नवरात्र के दौरान यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं और इसकी प्राचीनता इसे क्षेत्र के प्रमुख आस्था स्थलों में शामिल करती हैं।
स्थानीय निवासी अनिल सिंह अंदोत्रा के अनुसार, माता बाला सुंदरी मंदिर का इतिहास कई प्रचलित धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा हुआ है। इन मान्यताओं के चलते कठुआ जिले के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा पंजाब से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां माथा टेकने पहुंचते हैं। नवरात्र के दिनों में मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना होती है और पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहता है।
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राजा आनंगपाल से जुड़ी है मंदिर निर्माण की मान्यता
स्थानीय निवासी अनिल सिंह अंदोत्रा के अनुसार, स्थानीय मान्यता है कि पंजाब के राजा आनंगपाल ने माता बाला सुंदरी की महिमा सुनने के बाद उनके दर्शन करने का निर्णय लिया था। इसके बाद उन्होंने यहां माता के मंदिर का निर्माण करवाया। हालांकि, इस कथा के संबंध में ऐतिहासिक प्रमाणों की पुष्टि नहीं है, लेकिन स्थानीय श्रद्धालुओं के बीच यह मान्यता लंबे समय से प्रचलित है। पंजाब के भक्तों की मंदिर के प्रति विशेष आस्था को भी इसी धार्मिक जुड़ाव से जोड़कर देखा जाता है।
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महंत तारामुनि की दराती से जुड़ी है पिंडी प्रकट होने की कथा
मंदिर से जुड़ी एक अन्य प्रचलित कथा के अनुसार, प्राचीन समय में मंदिर के आसपास घना जंगल हुआ करता था। उस दौरान महंत तारामुनि गाय के लिए घास काटने जंगल में जाते थे। एक दिन घास काटते समय उनकी दराती जमीन में मौजूद माता की पिंडी से जा लगी। मान्यता है कि दराती लगने से पिंडी से रक्त बहने लगा। यह देखकर महंत घबरा गए और उन्होंने इसे किसी नाग को चोट लगने की घटना समझकर पूजा शुरू कर दी।
किंवदंती के अनुसार, बाद में माता ने महंत तारामुनि को स्वप्न में दर्शन देकर बताया कि दराती उनकी पिंडी से लगी थी। स्थानीय श्रद्धालुओं की मान्यता है कि मंदिर में माता बाला सुंदरी की पिंडी के साथ उनकी बहन सुंदरी की पिंडी भी विराजमान है। इसी आस्था के चलते भक्त यहां परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना लेकर पहुंचते हैं।
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नवरात्र में नौ दिन तक विशेष पूजा और लंगर
शारदीय नवरात्र के दौरान मंदिर में नौ दिनों तक विशेष पूजा-अर्चना का सिलसिला जारी रहता है। मंदिर कमेटी की ओर से श्रद्धालुओं के लिए लंगर की व्यवस्था भी की जाती है। नवरात्र के अंतिम दिन विशेष यज्ञ का आयोजन होगा। रविवार को बारिश के बीच भी श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रही। भक्तों की सुविधा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए मंदिर कमेटी तथा सेवादार जुटे हुए हैं।