शहर के वार्ड 5 में डेंगू के मामले आने के बाद दवा का छिड़काव करवाती स्वास्थ्य विभाग की टीम। संवाद
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कठुआ। कठुआ जिले में कोरोना तो नियंत्रण में नजर आ रहा है लेकिन डेंगू के मामले अनियंत्रित होते जा रहे हैं। शुक्रवार को 14 नए मामले सामने आने के बाद जिले में डेंगू को लेकर खौफ और बढ़ गया है। आधिकारिक आंकड़े जहां 46 पहुंचे हैं वहीं अधिकारियों को अन्य जगह से तीन डेंगू के मामले और रिपोर्ट हुए हैं। लेकिन अनाधिकारिक तौर पर जिले में डेंगू पॉजिटिव मरीजों का आंकड़ा 80 के लगभग पहुंच चुका है। वहीं बीते महीने एक मौत भी डेंगू से हुई है।
कठुआ रेलवे स्टेशन से सटे गोविंदसर गांव से दो दर्जन से भी अधिक डेंगू के मामले सामने आ चुके हैं। ताजा मामलों में पांच गोविंदसर गांव से ही हैं। डेंगू के हॉट स्पॉट बने गोविंदसर गांव में हाल के समय में संदिग्ध बुखार के बाद मौत भी हो चुकी हैं। जनप्रतिनिधि भी मामले में क्षेत्र के हालात और प्रशासन की लापरवाही को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। जीएमसी कठुआ के सहायक अस्पताल में डेंगू वार्ड स्थापित किए जाने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई स्प्रे तक ही सीमित नजर आ रही है। कारक मच्छर के सैंपल लेने से लेकर इसके फैलने की वजह को लेकर काम नहीं किया जा रहा है। यही वजह है कि गोविंदसर के इलाके से शुरू हुआ डेंगू का डंक कठुआ शहर के बाद अब हाईवे से सटे आधा दर्जन से अधिक गांव में अपने पैर पसार चुका है। शुक्रवार को सामने आए 14 मामलों में से कठुआ शहर से तीन, सेहस्वां, बरवाल, फ्लोट, चड़वाल और खरोट से एक-एक डेंगू के मामले सामने आए हैं। साफ है कि डेंगू अपने पैर हीरानगर सब डिवीजन में भी पसारने लगा है।
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निजी लैब से मिल रही रिपोर्ट पर नहीं स्वास्थ्य विभाग का नियंत्रण
जिले में डेंगू को लेकर हालात जहां बिगड़ते जा रहे हैं वहीं निजी लैब की ओर से संदिग्ध बुखार को लेकर की जा रही डेंगू की जांच भी स्वास्थ्य विभाग के नियंत्रण से बाहर है। एलाइजा के बिना ही जांच रिपोर्ट में पॉजिटिव पाए जाने पर लोग पंजाब के निजी अस्पतालों में इलाज के लिए जा रहे हैं, जहां पिछले कुछ दिनों से बेड पूरी तरह से फुल हो चुके हैं और लोगों को उपचार के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।