कठुआ। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले में डेंगू के डंक को लेकर दिखाए जा रहे आंकड़े धोखा मात्र साबित हो रहे हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार जिले में जहां डेंगू ने अबतक तीन ही लोगों को प्रभावित किया है, वहीं असलियत में यह आंकड़ा इससे कहीं अधिक है।
पिछले एक महीने में ही गोविंदसर गांव से सटे कठुआ रेलवे स्टेशन की रिहायशी कॉलोनी में आधा दर्जन के लगभग लोगों को डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। यहां तक कि कॉलोनी के लोगों का दावा है कि एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान महिला को डेंगू की पुष्टि हो चुकी थी, जिसने दिल्ली में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। पॉजीटिव पाए जाने से पहले महिला कठुआ रेलवे स्टेशन से सटी कॉलोनी में ही रह रही थी।
डेंगू ने एक महीने के भीतर ही कठुआ रेलवे स्टेशन के स्टेशन अधीक्षक और सहायक अधीक्षक को भी डंक लगाया है। कॉलोनी से एक और व्यक्ति को डेंगू की पुष्टि शनिवार को जीएमसी कठुआ में भी हो गई है। लेकिन हैरत की बात है कि न तो स्वास्थ्य विभाग को मामले की भनक है और न ही अबतक प्रशासन की ओर से कोई इंतजाम सुनिश्चित किया गया है। खतरा इसलिए भी अधिक है, चूंकि कॉलोनी गोविंदसर गांव के वार्ड आठ से सटी है।
गोविंदसर गांव में स्वच्छता पखवाड़े के दौरान भी हालात बद से बदतर हैं। हर साल डेंगू के मामले इस इलाके से सामने आते रहे हैं। वहीं स्थानीय लोगों की मानें तो पिछले कुछ दिनों से क्षेत्र में संदिग्ध बुखार के भी कई मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे में प्रशासन को फौरन हरकत में आते हुए क्षेत्र में फॉगिंग करवानी चाहिए। कठुआ रेलवे स्टेशन पर तैनात एक अधिकारी ने बताया कि कॉलोनी में अबतक कई लोगों को डेंगू की पुष्टि हो चुकी है।
रेलवे स्टेशन पर तैनात एक महिला कर्मचारी ने बताया कि उनकी मां को कठुआ के निजी अस्पताल में उपचार के बाद नारायणा अस्पताल में ले जाया गया था, लेकिन उन्हें वहां डेंगू की पुष्टि हो गई। डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें लीवर में दिक्कत है, जिसके बाद लीवर के विशेषज्ञ अस्पताल में शिफ्ट किया गया। लेकिन उनकी मौत हो चुकी है। बताया कि उनके देवर और सास भी बुखार के बाद जीएमसी कठुआ के सहायक अस्पताल में भर्ती हैं। दोनों के प्लेटलेट काउंट कम हुए हैं। जिनमें से एक की शनिवार को आई रिपोर्ट में उन्हें डेंगू की पुष्टि हो चुकी है।
चेत सिंह गेटमैन ने बताया कि 16 सितंबर को उन्हें बुखार आया था, जीएमसी में जांच के दौरान उन्हें डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। यहां से उपचार के बाद पठानकोट में भी उपचार करवाया है। 19 सितंबर को डेंगू पाजीटिव आए रेलवे कर्मी शेर सिंह मीणा ने बताया कि यहां देखरेख करने वाला कोई नहीं था। ऐसे में बुखार के बाद वे घर को चले गए, जहां उन्हें डेंगू की पुष्टि हुई थी। फिलहाल वे लौट आए हैं। लेकिन कॉलोनी में बुखार के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
गोविंदसर गांव जाने वाले मार्ग पर लगे गंदगी के ढेर
कठुआ शहर से मात्र कुछ किलोमीटर दूर कठुआ रेलवे स्टेशन से सटे गोविंदसर गांव में स्वच्छ भारत की एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली। जहां जगह-जगह प्रशासन और अमला लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने की प्रतिज्ञा करवाता दिखाई दिया, वहीं रेलवे रोड से गोविंदसर गांव को जाने वाले मार्ग पर गंदगी के ढेर दिखाई दिए। गांव की गलियों में पानी जमा है, तो नालों की सफाई तो कभी हुई ही नहीं। साफ है कि संदिग्ध बुखार के मामलों ने ग्रामीणों की चिंता को और भी बढ़ा दिया है।
रेलवे कॉलोनी में रविवार को भेजी जाएगी टीम
जिले में डेंगू के चार मामले अलग-अलग जगह से अब तक सामने आए हैं। एक ही जगह डेंगू के मामलों की फिलहाल जानकारी नहीं है। कठुआ रेलवे कॉलोनी में डेंगू के मामलों को लेकर रविवार को टीम भेजकर जांच करवाई जाएगी। जरूरत पड़ने पर स्प्रे के साथ-साथ लोगों को जागरूक भी किया जाएगा। स्वास्थ्य टीमों ने मामले को रिपोर्ट क्यों नहीं किया, इसकी भी जांच की जाएगी।
- डॉ. अशोक चौधरी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, कठुआ