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ढक्कियों की नहीं हो रही मरम्मत

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रामकोट। पहाड़ी क्षेत्र के दूरदराज इलाके आज भी विकास से कोसों दूर हैं। रामकोट में कई वर्षों से खस्ताहाल पड़ी टंकियों की मरम्मत की मांग लोगों ने की, मगर सुनवाई नहीं है। कुछ ऐसा ही रामकोट कस्बा का हाल है। यहां के लोगों को सड़क सुविधा नसीब नहीं है। लोग आज भी ढक्कीयों पर चलने को मजबूर हैं। नायब सरपंच अश्वनी कुमार ने बताया कि कई जगह सड़कें तबाह हो चुकी हैं। जंगली झाड़ियों से ढके रास्तों पर चलना मुश्किल है। जोगिंदर कुमार ने कस्बे तक जाने वाली ढक्कीयों की मरम्मत करवाने की मांग की है।
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बस स्टैंड से कस्बा तक जाने के लिए चार मार्ग हैं। ऊंची पहाड़ी पर बस्ती होने के कारण धार रोड से मात्र 200 से 300 फिट ढक्कियों वाले रास्ते आज तक नहीं बन पाए हैं। पंचायत की ओर से कई बार इन रास्तों के मरम्मत के लिए प्लान भी बने। मगर हर बार अधूरा कार्य होने के कारण रास्तों की हालत नहीं सुधर सकी। हालांकि कस्बे को जाने के लिए दो तरफा सड़कों का निर्माण भी हो चुका है, मगर यात्री वाहन की सुविधा न होने के कारण लोगों को सड़क के रास्ते से 2 से 3 किलोमीटर पैदल सफर करना पड़ता है।
कस्बा के वार्ड 1, 2 और तीन से होकर निकलने वाली यह ढक्कियां वार्ड 6, 7, 8, 9, 10 और 11 व गांव बूल, कोहड़ी ठ्याल, सर, सर्थ और सबल को धार रोड से जोड़ती हैं। लेकिन इन गांवों से तहसील मुख्यालय आदि सरकारी कार्यालयों तक पहुंचने के लिए सड़क के रास्ते 5 किलोमीटर तक का सफर करना पड़ता है। इसके कारण लोगों को कई किलोमीटर पैदल चलने के साथ, दो बार गाड़ियां भी बदलनी पड़ती ही। लोगों ने प्रशासन से कस्बा की इन सभी पुरानी ढक्कियों को समतल करने की मांग की है
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