एक तरफ राज्य सरकार एमनेस्टी स्कीम की मियाद बढ़ाकर लोगों को कायदे से बिजली बिल चुकाने का पाठ पढ़ा रही है, वहीं जिले में कई ऐसे विभाग हैं, जो बिजली विभाग को ही चूना लगा रहे हैं। करोड़ों का बकाया हो जाने के बाद भी वे बिल चुकाने का नाम नहीं ले रहे हैं। ऐसे में अब बिजली विभाग ने बकायेदार विभागों की सूची तैयार कर उनकी सप्लाई बंद करने का मन बना लिया है। बिजली विभाग ने बकायादार विभागों से मार्च तक बिल न जमा करवाने पर विद्युत आपूर्ति बंद करने की चेतावनी दी है।
पिछले एक दशक में खपत की गई बिजली का बिल भुगतान न करने वाले विभागों की सूची भी लंबी है। इन पर लाखों, करोड़ों की बकायादारी है, लेकिन बिल चुकाने के मामले में कन्नी काट लेते हैं। इनमें सबसे ऊपर कठुआ नगर परिषद और जिला की सभी नगर कमेटियां हैं, जिनकी बकायादारी दो करोड़ से भी अधिक है। इस साल इन्होंने 26 लाख से अधिक की बिजली फूंक दी है, लेकिन विभाग को एक फूटी कौड़ी तक जमा नहीं करवाई है। यह सिलसिला अभी शुरू नहीं हुआ है, पिछले कई वर्षों से ऐसा ही जारी है।
शिक्षा विभाग की स्थिति भी बेहतर नहीं है। विभाग पर पिछले कई वर्षों से बकायादारी इस कदर बढ़ चुकी है कि अब यह रकम कुल मिलाकर 41 लाख पहुंच गई है। लोक निर्माण विभाग ने इस साल दो लाख से अधिक की बिजली फूंक दी और लगभग डेढ़ लाख जमा भी करवा दिया है, लेकिन पिछली बकायादारी न चुकाए जाने से अब विभाग की देनदारी 13 लाख को पार कर गई है। राजस्व विभाग ने इस साल तीन लाख की बिजली फूंकी और मात्र 35 हजार ही जमा करवाए हैं।
हैरानी की बात यह है वित्तीय वर्ष की शुरुआत पर इन पर भी पांच लाख से अधिक की देनदारी थी, जो अब कुल मिलाकर 8 लाख को पार कर गई है। छोटे बकायादारों की सूची काफी लंबी है जो बिजली को लाखों और कई हजारों में फूंकते हैं, लेकिन बिल कुछ हजार का चुकाते हैं। इनमें आईटीआई, प्लानिंग विभाग, मछली पालन विभाग, जियोलाजी माइनिंग विभाग, लेबर कमिश्नर, फ्लोरिक्लचर विभाग, बाढ़ नियंत्रण विभाग, सिकॉप, गांधी सेवा सदन भी शामिल हैं।
बिजली विभाग के कार्यकारी अभियंता संदीप सेठ ने बताया कि कई विभाग ऐसे हैं, जिन पर करोड़ों की देनदारी है। बकायादार विभागों की सूची तैयार की गई है और उनसे अपील की गई है कि जल्द से जल्द बकाया राशि जमा करवाएं। जरूरी सेवाओं के विभागों को छोड़कर अन्य सभी विभागों की बिजली काटने की तैयारी है, जो बिल नहीं चुका रहे हैं।