कठुआ। प्रदेश में सैनिक कीटों को लेकर जारी हुई एडवाइजरी के बाद कठुआ जिले के पहाड़ी इलाकों में मक्की की फसल पर हमले की पुष्टि हो गई है। कृषि विभाग की टीमों ने जिले के पहाड़ी इलाकों में बिलावर, बसोहली और बनी के निचले इलाकों में इसका असर फसल पर देखा है।
इसके बाद किसानों को दवाओं के छिड़काव को लेकर निर्देश भी जारी किए गए हैं। बाकायदा कृषि विभाग की टीमें पिछले एक सप्ताह से पहाड़ी इलाकों में डेरा डाले हुए हैं और स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।
मुख्य कृषि अधिकारी विजय कुमार उपाध्याय ने कीट के हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि सैनिक कीट के हमले का असर बिलावर और बसोहली के कुछ इलाकों में देखा गया है। लगभग दो सौ हेक्टेयर फसल इससे प्रभावित हुई है। कठुआ जिले में 23 हजार हेक्टेयर में मक्की की फसल लगाई जाती है। चूंकि, यह कीट एक दिन में सौ किमी तक सफर कर फसल को नष्ट कर सकता है, ऐसे में अन्य क्षेत्रों पर भी नजर रखी जा रही है। किसानों के लिए मुसीबत यह भी है कि जिले के पहाड़ी इलाकों में इस बार लगातार जारी रही बारिश और कई बार हुई ओलावृष्टि से जहां मक्की की फसल पहले ही देरी से लग पाई है। वहीं, अब सैनिक कीट के हमले से फसल की बर्बादी ने उनकी चिंता को और बढ़ा दिया है।
क्या होता है आर्मी वर्म (सैनिक कीट)
दरअसल, जिले के पहाड़ी इलाकों में मक्की को प्रमुख फसल माना जाता है। और, इस फसल को नुकसान पहुंचाने वाला सैनिक कीट (आर्मी वर्म) प्रमुख जीव है। इस कीट का लार्वा मक्के के छोटे पौधों के तनों में अंदर घुस जाता है और अपना भोजन प्राप्त करता है। इससे फसल पूरी तरह से नष्ट हो जाती है।
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आर्मी वर्म की पहचान
इस कीट की पहचान पत्तियों पर लार्वा के मलमूत्र से होती है। यह कीट मक्का की पत्तियों पर भूसे के बुरादे जैसा दिखाई देता है। इसके लिए किसानों को अपनी फसलों पर नियमित रूप से निगरानी रखनी चाहिए। अगर फसल पर इस कीट के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत उसका उपचार कर देना चाहिए। कृषि विभाग के अनुसार इस कीट के पनपने लिए गर्म और नम दोनों मौसम अनुकूल हैं।