हीरानगर। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) पर तारबंदी के आगे 19 वर्षों के बाद किसानों ने खेती का काम शुरू कर दिया है। लंबे अर्से बाद अपने खेतों में पांव रखने के बाद कई किसान भावुक हो गए। मिट्टी को चूमकर किसानों ने खेतों की जुताई शुरू की। किसानों में उत्साह इस कदर था कि सुबह से लेकर शाम तक बिना भोजन किए ही वे काम में जुटे रहे।
कृषि विभाग की टीम के साथ किसान सुबह 9 बजे छन्न टांडा गांव में खेती के लिए गए। बीएसएफ की सुरक्षा के बीच शाम 4 बजे तक यहां जुताई का काम चलता रहा। पहले दिन करीब 15 एकड़ जमीन जुताई के बाद खाद डालकर बीज बोने के लिए तैयार कर दी गई है। जहां वीरवार को गेहूं का बीज बोया जाएगा। आज उन किसानों को तारबंदी के आगे भेजा गया, जिन्होंने पहले अपने नाम दर्ज कराए थे। जैसे ही आज यह काम सफलतापूर्ण तरीके से शुरू हुआ तो और भी कई किसानों ने तारबंदी के आगे खेती करने के लिए नाम दर्ज करा दिए।
पहली बार यहां खेती करने वाले किसानों को कृषि विभाग की ओर से मुफ्त में गेहूं का बीज और खाद उपलब्ध कराई जा रही है। पहले चरण में कृषि विभाग के सहयोग से किसान डेढ़ सौ एकड़ जमीन पर गेहूं की फसल बोएंगे। तारबंदी के आगे खेती शुरू कराने के लिए किसानों ने जिला प्रशासन और बीएसएफ का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यहां खेती शुरू होने से सीमावर्ती किसानों को काफी लाभ होगा और आर्थिक हालात भी सुधरेंगे।
19 वर्ष बाद तारबंदी के आगे खेतों में जाकर काम करने का मौका मिलने पर किसान बेहद खुश हैं। हमारी टीम भी मौजूद रही। जिन लोगों को आज खेतों में भेजा गया उन्हें विभाग की ओर से खाद उपलब्ध कराई गई। बाद में भी जो जाएंगे उन्हें भी मुफ्त बीज व खाद दी जाएगी। करीब 15 एकड़ जमीन पहले दिन खेती के लिए तैयार की गई है, जिसमें खाद डाल दी गई है। बीज वीरवार को बोया जाएगा। डेढ़ सौ एकड़ जमीन पर फसल बोई जाएगी। यह जमीन बेहद उपजाऊ है। यहां लगातार किसान काम करेंगे, तो निश्चित रूप से आने वाले समय में सीमावर्ती किसानों के आर्थिक हालात में काफी सुधार होगा।
-वणिजय उपाध्याय, मुख्य कृषि अधिकारी।
किसानों को खेती के लिए तैयार करने में प्रशासन को लग गया एक वर्ष
संवाद न्यूज एजेंसी
हीरानगर। तारबंदी के आगे खेती के लिए किसानों को प्रेरित करने के लिए प्रशासन पिछले एक वर्ष से प्रयास कर रहा था। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और किसान खुद खेती करने को तैयार हुए और काम शुरू कर दिया। पिछले साल सितंबर में जिला उपायुक्त ओपी भगत ने किसानों को तारबंदी के आगे खेती के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से मनयारी क्षेत्र में खेती का काम शुरू कराया था।
प्रशासन ने बीएसएफ के सहयोग से यहां 800 कनाल जमीन पर गेहूं बोई। फसल की कटाई का काम भी प्रशासन ने कराया। उसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने कई बार सीमावर्ती किसानों से बैठकें कर संवाद किया। पिछले माह उपायुक्त राहुल यादव ने बीएसएफ की चांदमा पोस्ट पर कृषि विभाग के अधिकारियों और बीएसएफ के अधिकारियों के साथ बैठक की, जहां किसान भी मौजूद रहे। उन्होंने किसानों को तारबंदी के आगे खेती करने की अपील की और हर संभव सहायता का आश्वासन दिया। इसके बाद कुछ किसानों ने तारबंदी के आगे खेती करने की इच्छा जाहिर करते हुए अपने नाम दर्ज कराए। आज उन्हीं किसानों को खेती करने के लिए तारबंदी के आगे भेजा गया।
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किसानों की सुरक्षा में हर 20 फुट की दूरी पर तैनात रहा बीएसएफ का जवान
छन्न टांडा में 19 वर्षों के बाद तारबंदी के आगे खेती के लिए जमीन तैयार करने गए किसानों को सीमा सुरक्षा बल की ओर से कड़ी सुरक्षा उपलब्ध कराई गई। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बीएसएफ के जवान किसानों की सुरक्षा में एक कतार में खड़े रहे। हर 20 फुट की दूरी पर जवान तैनात था और अधिकारी किसानों को बार-बार यही कह रहे थे कि बेखौफ होकर अपने खेतों में काम करें। दरअसल सोमवार को भी किसान और कृषि विभाग की टीम यहां काम करने के लिए गई थी, लेकिन सुरक्षा की गारंटी नहीं मिलने पर किसान वापस लौट आए थे। इसके बाद मंगलवार को बीएसएफ के अधिकारियों ने कृषि विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में किसानों से बैठक की और आश्वासन दिया कि सुरक्षा का पूरा इंतजाम किया जाएगा।