उन्होंने कहा कि इसी तरह हमारे भारत का एक और उदाहरण है- गुरु गोबिंद सिंह जी के बेटों का शौर्य और बलिदान। साहिबजादों ने जब असीम वीरता, धैर्र्य, साहस के साथ पूर्ण समर्पण भाव से बलिदान दिया था तब उनकी उम्र बहुत कम थी। भारत की सभ्यताएं, संस्कृति, आस्था और धर्म के लिए उनका बलिदान अतुलनीय है। साहिबजादों के बलिदान की स्मृति में देश ने 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस की भी शुरुआत की है।
उन्होंने कहा कि हमारे देश के छोटे-छोटे बच्चों, बेटे-बेटियों ने हर युग में इतिहास लिखा है। हमारी आजादी की लड़ाई में वीरबाला कनकलता बरुआ, खुदीराम बोस, रानी गाइडिनिल्यू जैसे वीरों का ऐसा इतिहास है जो हमें गर्व से भर देता है। इन सेनानियों ने छोटी सी उम्र में ही देश की आजादी को अपने जीवन का मिशन बना लिया था। उसके लिए खुद को समर्पित कर दिया था।