मुस्तफा इब्न जमील
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इसके बाद एक महीने के भीतर लैमिनेशन का कार्य पूरा किया गया। उन्होंने बताया कि पूरे प्रोजेक्ट में 2.5 लाख रुपए खर्च हुए। इसे पूरा करने में सात माह लगे। युवा कॉलिग्राफर मुस्तफा ने दावा किया कि उनके काम का जल्द ही एशियन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, इंडियन बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और इंटरनेशनल बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में उल्लेख होगा, जिसके लिए दस्तावेजीकरण की प्रक्रिया जारी है।