प्रदेश सरकार खेल ढांचे के निर्माण पर जोर दे रही है, लेकिन खेल प्रशिक्षकों की कमी खिलाड़ियों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। खेल विभाग में प्रशिक्षकों की कमी के चलते प्रदेश के खिलाड़ी दूसरे राज्यों का रुख कर रहे हैं। पदक उन्मुख खेलों में कोच नहीं होने से खिलाड़ी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं।
पिछले कुछ वर्षों से सरकार खेल ढांचे के विकास को अधिक महत्व दे रही है। जिलों में इंडोर स्टेडियम तैयार किए जा रहे हैं, जम्मू एथलेटिक सिंथेटिक ट्रैक, फुटबॉल और हॉकी मैदान पर सिंथेटिक टर्फ बिछाई जा रही है। नगरोटा में खेल गांव तैयार हो रहा है। सरकार खेल ढांचे को विकसित कर रही है, लेकिन खिलाड़ियों को तैयार करने वाले प्रशिक्षकों की संख्या को नहीं बढ़ा रही है।
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जम्मू और श्रीनगर जिले को छोड़ दें तो अन्य जिलों में एक प्रशिक्षक के हवाले ही पूरा जिला है। खेल प्रशिक्षकों की कमी का असर हमारे खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर पड़ रहा है। स्पोर्ट्स काउंसिल में 88 कोच के पद स्वीकृत हैं जिसमें सिर्फ 45 पद ही भरे हैं। वेटलिफ्टिंग, कुश्ती, तीरंदाजी सहित अन्य पदक उन्मुख खेलों में तो कोच ही नहीं है। सरकार प्रतिनियुक्ति पर प्रशिक्षकों को स्पोर्ट्स में लाने की तैयारी कर रही है।