राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने रामनगर में बच्चों की मौत के मामले में पीड़ित परिवाराें को तीन-तीन लाख रुपये का मुआवजा देने के लिए चार हफ्ते की मोहलत दी है। साथ ही कहा है कि यदि मुआवजा नहीं दिया जाता है तो जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव व्यक्तिगत रूप से आयोग के समक्ष हाजिर होने को तैयार रहें।
इससे पूर्व एनएचआरसी ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन को छह सप्ताह का समय देकर मुआवजा देने को कहा था। इस मामले को आयोग ले जाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सुकेश खजूरिया ने कहा कि रामनगर में घटिया दवा के सेवन से बच्चों की मौत हो गई थी। इसमें दवा निर्माता कंपनी के साथ सरकारी विभाग की लापरवाही भी जिम्मेवार थी।
मानवाधिकार आयोग ने तमाम पहलुओं को देखने के बाद पाया कि सरकार की ओर से लापरवाही हुई है। ऐसे में पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिया जाना चाहिए। आयोग के आदेश पर सरकार टालमटोल करती रही। इसी बीच हाईकोर्ट में रिट याचिका के माध्यम से आयोग के आदेश को रद्द करने की मांग की।
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कोर्ट ने साफ किया कि इस मामले में वे आयोग के आदेश को नहीं पलट सकते। आयोग ने निर्धारित अवधि के भीतर मुआवजा न देने पर फिर से चार माह की मोहलत देकर कहा है कि यदि आदेश पर अमल नहीं किया जाता है तो मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से आयोग के समक्ष उपस्थित होना पड़ेगा।.