जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने प्रदेश सरकार को संतूर होटल के कर्मचारियों के खिलाफ कम से कम तीन सप्ताह तक कोई प्रतिकूल कार्रवाई न करने का आदेश दिया है। अदालत का यह आदेश सरकार द्वारा संतूर लेक व्यू होटल का कब्जा लेने के एक हफ्ते बाद आया है। होटल कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एचसीएल) को संतूर होटल 99 साल के पट्टे पर दिया गया था, परंतु पट्टे की शर्तों के उल्लंघन के बाद इसे सील कर दिया गया था।
अदालत ने वीरवार को याचिकाकर्ताओं (संतूर होटल कर्मचारी संघ) को आदेश दिया कि वह दो सप्ताह के अंदर सभी उत्तरदाताओं (संबंधित सरकारी अधिकारियों) के समक्ष अपना व्यापक पक्ष रखें और यदि वे ऐसा करते हैं तो प्रतिवादियों को एक सप्ताह की अवधि के भीतर इस पर विचार करने का निर्देश दिया जाता है।
इस बीच, अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि वह तब तक कर्मचारियों के खिलाफ कोई प्रतिकूल कार्रवाई न करे जब तक कि अभ्यावेदन पर विचार और निर्णय नहीं लिया जाता। अदालत ने कहा, यदि याचिकाकर्ता (कर्मचारी) निर्धारित समय के भीतर अभ्यावेदन दाखिल करने में विफल रहते हैं, तो उस स्थिति में, प्रतिवादी कानून के अनुसार कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होंगे।
कर्मचारियों ने मांगी थी काम करने देने की अनुमति
कर्मचारियों के वकील एमआई डार ने कहा कि सरकार की ओर से 25 अप्रैल 2022 को जारी नोटिस में बेदखली नोटिस जारी करने की तारीख से 45 दिनों के भीतर परिसर खाली करने की बात नहीं कही गई थी। कर्मचारियों ने अपनी याचिका में उन्हें चश्मे शाही स्थित संतूर होटल में अपने संबंधित पदों पर काम करने और अपने सामान्य कर्तव्यों का पालन करने की अनुमति देने के लिए निर्देश देने की मांग की थी।