लंबे अंतराल के बाद आखिरकार राज्यपाल शासन के दौरान ही रियासत की लंबी औद्योगिक नीति घोषित कर दी गई। दस साल के लिए बनी औद्योगिक नीति में उद्यमियों के लिए पूर्व की तरह कई इन्सेंटिव बरकरार रखे गए हैं, लेकिन औद्योगिक क्षेत्र की जमीन की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि ने उद्यमियों को सकते में डाल दिया है।
औद्योगिक क्षेत्र की जमीन में प्रति कनाल तीन से पांच लाख रुपये वृद्धि की गई है। उद्योग जगत से जुड़े जानकारों का कहना है कि पिछले कुछ साल में जमीनों की कीमतें काफी बढ़ी हैं, लेकिन नीति निर्धारकों को उद्योगों के विस्तार को ध्यान में रखते हुए औद्योगिक क्षेत्र की जमीन की कीमतों में इतना इजाफा नहीं करना चाहिए था।
गुजरात में औद्योगिक नीति के तहत बड़े उद्योगों को एक रुपये प्रति कनाल जमीन दी गई, ताकि उद्योग लगने के बाद गुजरात की आर्थिक स्थिति मजबूत हो, लेकिन रियासत में इस बात पर ध्यान नहीं दिया गया। उनका कहना है कि जिन बड़े उद्योगों को 50 से 100 कनाल जमीन की जरूरत है, तो उन्हें इस पर काफी खर्च करना पड़ेगा।
पुरानी उद्योग नीति में औद्योगिक क्षेत्र में चार कनाल तक जमीन दो लाख रुपये प्रति कनाल अदा करने पड़ते थे, लेकिन नई औद्योगिक नीति में पांच कनाल तक की जमीन के लिए पांच लाख रुपये प्रति कनाल देने होंगे। इसी तरह पुरानी नीति में चार कनाल से ऊपर जमीन पर तीन लाख रुपये प्रति कनाल देने पड़ते थे, लेकिन नई औद्योगिक नीति में 5 से 10 कनाल के लिए छह लाख प्रति कनाल, 10 से 20 कनाल के लिए सात लाख रुपये प्रति कनाल और 20 कनाल से ज्यादा के लिए आठ लाख रुपये प्रति कनाल देने पड़ेंगे।
हालांकि नई नीति के तहत औद्योगिक जमीन 90 साल की लीज में दी जाएगी। पहले चरण में 40 साल की लीज होगी और उसके बाद उसकी लीज फिर 40 साल के लिए बढ़ाई जाएगी। हालांकि लीज की अवधि किसी भी परिस्थितियों में 90 साल से ज्यादा नहीं होगी।
उद्योगों के लिए नई जमीन तलाशी जाएगी
रियासत के औद्योगिक क्षेत्र में नए उद्योगों के लिए पर्याप्त जमीन न होने के कारण सरकार शहरी क्षेत्र के बाहर जमीन तलाशेगी। नई नीति के अनुसार उद्योगों की स्थापना के लिए पर्याप्त जमीन पहली शर्त है, इसलिए सरकार 20 हजार कनाल जमीन तलाश कर उद्योग और वाणिज्य विभाग को स्थानांतरित करेगी। सरकार का उद्देश्य वर्ष 2026 तक 20 हजार करोड़ का निवेश लाकर औद्योगिक क्रांति लाने का है।