जम्मू-कश्मीर में आईजीपी कश्मीर ने बताया कि कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म चला रहे हैं कि तालिबान के अफगानिस्तान के अधिग्रहण के बीच कश्मीर घाटी के विभिन्न हिस्सों से 60 युवा लापता हो गए हैं। उनका कहना है कि यह खबर पूरी तरह से फर्जी खबर है।
दरअसल जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खात्मे के लिए सुरक्षाबल लगातार अभियान चला रहे हैं। मुठभेड़ के दौरान घिरे स्थानीय आतंकियों को आत्मसमर्पण करने का मौका भी दिया जाता है। इसके लिए आतंकी के परिजनों को भी मुठभेड़ स्थल पर बुलाया जाता है। सुरक्षाबलों और परिजनों की बात न मानने के बाद आतंकियों का खात्मा किया जाता है।
घाटी के युवाओं को लालच देकर गुमराह करने और जन्नत के ख्वाब दिखाने वाले आतंकी खुद जब सुरक्षाबलों के घेरे में फंसते हैं तो उनको जिंदगी का मतलब समझ आता है। इस बात को अब घाटी के युवा भी समझ चुके हैं, इसी का नतीजा है कि स्थानीय स्तर पर आतंकियों की भर्ती में भारी कमी आई है। आतंक का दामन छोड़कर अब युवा मुख्यधारा में आ रहे हैं।
बीते साल मई महीने में श्रीनगर में नवाकदल मुठभेड़ में दो आतंकी जुनैद सहराई और तारिक अहमद शेख मारे गए थे। इनके मारे जाने के बाद अराजकतत्वों ने पत्थरबाजी की। इस दौरान पत्थरबाजों ने सुरक्षाबलों और सैन्य वाहनों पर पथराव किया। इतना ही नहीं आगजनी भी की। हालांकि इन सबके पीछे जुनैद के साथ मौजूद तारिक का वो आखिरी फोन कॉल था जो उसने मरने से पहले एक शख्स को किया था और कुछ बातें कहकर गिड़गिड़ाया था।