जम्मू-कश्मीर में लाखों साल पुराने फासिल स्लाइडिंग के पहाड़ आज भी लैंड स्लाइडिंग का कारण बने हुए हैं। हालांकि कुछ उपायों के जरिए इसे रोका जा सकता है।
इन पहाड़ों की कमजोरी यह है कि ये ठोस चट्टानों के रूप में नहीं हैं।
पोरस मिट्टी के बीच-बीच में गोल पत्थरों के टुकड़े जमे हुए हैं। यह गोल पत्थर लागातार लाखों साल तक पानी के बहाव के साथ लुढ़कने के कारण गोल हो चुके हैं।
इस वजह से मिट्टी की पकड़ ढीली होती है, जो बारिश होते ही पहाड़ों से मिट्टी के साथ नीचे खिसक जाते हैं। सबसे ज्यादा लैंड स्लाइडिंग श्रीनगर हाईवे, डोडा-बटोत, बनी-बसोहली, किश्तवाड़ और मुगल रोड में पीर गली के पास होती है।
यह खतरा तब और बढ़ जाता है जब फासिल स्लाइडिंग वाले पहाड़ों को चिह्नित किए बिना सड़कें चौड़ा करने के साथ कुछ नई सड़कें बनाई जाती हैं।
कई बार सड़क बनाने के लिए पास की पहाड़ों से मिट्टी निकाली जाती है। इस दौरान पहाड़ के ढलान के साथ छेड़छाड़ होती है। यह भी लैंड स्लाइडिंग का एक बड़ा कारण है।