एनआईटी में गैर कश्मीरी छात्रों पर लाठीचार्ज के बाद हो रही आलोचनाओं पर जम्मू कश्मीर पुलिस के तीन अधिकारियों ने कहा कि उन्हें किसी से देशभक्ति और निष्पक्षता का प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं है। इन अधिकारियों ने जवाब देने के लिए फेसबुक का सहारा लिया है।
एसएसपी क्राइम मुबसिर लतीफी के अनुसार पुलिस बल को देशभक्ति या निष्पक्षता के किसी प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है खासकर उनसे जिनकी वीरता उनके कीपैड से परे नहीं। उनके अनुसार जम्मू-कश्मीर पुलिस बलिदान और साहस की एक गाथा है जिसने राज्य को आतंकवाद के पागलपन से बाहर निकाला है।
पुलिस स्थानीय और बाहरी के बीच भेदभाव नहीं करती है। न ही लोगों की पिटाई में मजा आता है। बल प्रयोग सिर्फ कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए किया जाता है। बारामुला जिले के डीएसपी फिरोज याहया ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के एक वर्ग पर निशाना साधते हुए अपने फेसबुक पेज पर लिखा कि मेरे कई सहयोगी पूछ रहे हैं और अन्य कई सोच रहे होंगे कि हम किससे युद्ध लड़ रहे हैं।
मैं सिर्फ इतना बता सकता हूं कि यह सिर्फ एक चरण है जो समाप्त हो जाएगा। जम्मू-कश्मीर पुलिस को लोगों (इलेक्ट्रानिक मीडिया में) से किसी भी प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है। हमें कानून के दायरे में अपना अच्छा काम जारी रखना चाहिए और इससे हमें कोईरोक नहीं सकता है।
शोपियां जिले के एसएसपी शैलेंदर मिश्रा द्वारा एनआईटी छात्रों को सलाह दी गई है कि वह जिम्मेदारी से शब्दों का प्रयोग करें। जम्मू-कश्मीर पुलिस उच्च पेशेवर मानकों के साथ एक राष्ट्रवादी बल है।