थ्रू वॉल रडार की मदद से पांच लोग निकाले
बचाव कार्य में सुबह से थ्रू वॉल रडार की मदद ली जा रही है। इससे जमीन में कंपन के आधार पर यह पता लगाया जा रहा है कि मलबे और पत्थरों के नीचे कोई जिंदगी तो नहीं फंसी हुई है। इसी आधार पर सुरक्षा बलों ने पांच लोगों को जीवित और सुरक्षित निकालने में सफलता हासिल की है। पूरा तंत्र राहत और बचाव कार्य में जुटा हुआ है। सेना की ओर से हस्तचालित (हैंडहेल्ड) थर्मल इमेजर, नाइट विजन डिवाइस से बचाव दल रात के अंधेरे में जिंदगी की तलाश कर रहे हैं।
सीटी बजाकर किया सतर्क, पर पांच मिनट में ही सब तबाह
चंडीगढ़ के मनीष चौहान अपने चार अन्य साथियों प्रदीप राणा, संगम सिंह, हरदीप राणा व ठाकुर के साथ बाबा भोले के दर्शन के लिए बालटाल के रास्ते शुक्रवार को पवित्र गुफा पहुंचे थे। मनीष ने बताया कि शाम को दर्शन के बाद हम पांचों लोग गुफा के बाहर ही लगे करनाल वालों के लंगर में खाना खाने लगे। खाना खाकर बाहर निकले थे और पांच मिनट का समय ही बीता होगा कि तबाही का उफान शुरू हो गया। उस समय लंगर में 40-50 भक्त और लगभग 20 कारीगर-मजदूर रहे होंगे। देखते ही देखते पूरा लंगर बह गया। किसी को बचने तक का मौका नहीं मिला। आशंका जताई कि इस लंगर में रहने वाले श्रद्धालुओं को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है। बताया कि सीआरपीएफ के एक जवान ने एक महिला को तो बचा लिया लेकिन लगभग 22 साल की बेटी को नहीं बचाया जा सका। मनीष के साथी प्रदीप और हरदीप ने बताया कि गुफा के बगल से चूने के रंग का गाद और मलबा तेज बहाव के साथ नीचे आने लगा। पूरा मलबा हेलीपैड तक पसर गया है। वहां तैनात जवानों ने सीटी बजाकर तथा शोर मचाकर लोगों को सचेत किया तब जाकर कई जानें बच सकीं। कुछ लोगों ने नीचे भागकर तो कईयों ने ऊपर की ओऱ भागकर जान बचाई।
प्रशासन के बेहतर प्रबंध, पंजतरणी में टेंट किया मुफ्त
चंडीगढ़ निवासी मनीष, संगम सिंह और ठाकुर ने बताया कि सुरक्षा बलों ने सभी भक्तों को रात में पंजतरणी भेज दिया। यहां प्रशासन ने बेहतरीन प्रबंध कर रखे थे। लंगर तथा निजी टेंट वालों ने भी जी खोलकर यात्रियों का आतिथ्य किया। उन्होंने बताया कि पंजतरणी में सभी लंगर मुफ्त कर दिए गए थे। टेंट वालों ने कई यात्रियों जिनके बैग वगैरह बह गए थे उनके लिए कपड़े का बंदोबस्त किया। कइयों के फोन भी छूट गए थे।