राजस्थान हाईकोर्ट ने अदालती आदेश के बावजूद जेल सुधार के प्रभावी काम नहीं करने पर नाराजगी जताई है। इसके साथ ही राज्य के मुख्य सचिव, डीजी जेल, प्रमुख वित्त सचिव, प्रमुख स्वास्थ्य सचिव और प्रमुख तकनीकी शिक्षा सचिव को 11 मई को पेश होकर स्पष्टीकरण देने के आदेश दिए हैं। अदालत ने न्यायमित्र को छूट दी है कि वे दोषी अफसरों पर अवमानना की कार्रवाई के लिए प्रक्रिया आरंभ कर सकते हैं।
न्यायाधीश मोहम्मद रफीक और न्यायाधीश वीएस सिराधना की खंडपीठ ने यह आदेश प्रकरण में लिए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान पर सुनवाई करते हुए दिए। सुनवाई के दौरान आदेश की पालना में भेल के सीएमडी एमवी गौतमा अदालत में पेश हुए। जेल में जैमर के काम न करने का कारण बताते हुए सीएमडी ने कहा कि जेल की पांच सौ मीटर परिधि में मोबाइल टावर लगे हुए हैं। ये टावर निर्धारित मात्रा के चार गुणा तक तरंगे छोड़ रहे हैं। जिसके चलते जैमर्स काम नहीं कर पाते हैं। अभी केन्द्रीय कारागारों में 57 जैमर्स और स्थापित किए जाने हैं। इस पर अदालत ने कहा कि वे ऐसा जैमर लगाए जो उच्च तरंगों को रोकने में भी सक्षम हो। सुनवाई के दौरान न्यायमित्र प्रतीक कासलीवाल ने बताया कि 27 जनवरी 2016 को अदालत ने जेलों में कैदियों के हालात सुधारने के लिए 45 बिन्दुओं पर आदेश दिए थे। वहीं गत 9 मार्च को टॉयलेट्स, कैदियों की क्षमता के हिसाब से रसोई और मनोचिकित्सक सहित 16 आवश्यक बिंदुओं पर पूर्णतया पालना करने को कहा था। ऐसा नहीं करने पर
मुख्य सचिव को पेश होना था, लेकिन न तो कार्य पूरे हुए और न ही मुख्य सचिव अदालत में पेश हुए। राज्य सरकार की ओर से 9 केन्द्रीय कारागारों को लेकर 16 बिंदुओं पर पेश पालना रिपोर्ट को अदालत ने खानापूर्ति बताते हुए कहा कि इनकी स्पष्टतया पालना होनी चाहिए।