उदयपुर की राजसमंद झील के भरने के साथ ही उसके सौन्दर्यीकरण की जरूरत भी प्रशासन और राज्य सरकार को नजर आने लगी है। इस झील के निर्माता मेवाड़ के महाराणा राजसिंह के जीवन प्रसंगों पर एक विजुअल एण्ड साउण्ड शो दिखाए जाने की तैयारी चल रही है। सैलानी इसे थ्रीडी इफेक्ट में देख-सुन सकेंगे।
राणा राजसिंह पैनोरमा का काम भी तेजी से चल रहा है। इसे इस वर्ष के आखिर तक पूरा कर लिया जाएगा। पैनोरमा के साथ झील और राजनगर से सम्बंधित संग्रहालय की भी योजना है। यह काम राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण के तहत करीब सवा करोड़ रुपए के बजट से हो रहा है।
झील के साथ बने महल की मरम्मत का काम चल रहा है। जयपुर से बुलाए गए 30 कारीगर इमारत को संवारने में जुटे हैं। दीवारों से चूना निकालकर मार्बल पत्थर की धुलाई की जा रही है। पत्थर सूखने के बाद सुर्खी, गुड़, मैथी, चूना, सैलखड़ी का मिश्रण तैयार कर दीवारों का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। भवन में कई जगह उगे पेड़-पौधे और झाड़-झंखाड़ हटाए गए हैं। झील की ओर पीपल के बड़े वृक्ष की जड़ों से भवन को काफी नुकसान पहुंचा, जिन्हें हटाया गया है। कई जगह फर्श भी टूटा है, जिसकी मरम्मत की जा रही है। भवन की धुलाई, प्लस्तर व फर्श की मरम्मत के साथ ही लकड़ी के नए खिड़की-दरवाजे भी बनाए जा हैं। भवन के बाहर का रंग पीला व अन्दर सफेद होगा। पूरे काम पर करीब 45 लाख रुपए का बजट खर्च होगा।