बाड़मेर के काश्मीर गांव के रहने वाले राजूदास का शव आखिरकार 90 दिन बाद सऊदी अरब से भारत लाया गया। मौत के बाद शव नहीं मिलने से परिजन अब तक उसकी मौत का शोक मना रहे थे। यहां तक कि परिवार में शोक के कारण चूल्हा तक नहीं जलाया जा रहा था।
दरअसल, बाड़मेर से करीब 70 किलोमीटर दूर काश्मीर गांव का रहने वाला 36 वर्षीय राजूदास पुत्र भगदास मजदूरी के लिए सऊदी अरब गया था। इसी दौरान 19 फरवरी 2016 को वहां उसकी मौत हो गई। इसके बाद से परिजन अपने राजू का शव भारत लाने के लिए प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधियों तक गुहार लगा चुके थे। यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी पत्र लिखकर परिजनों ने अवगत कराया था। आखिरकार उनकी मुराद शुक्रवार को पूरी हो गई। केन्द्र सरकार के विदेश मंत्रालय के प्रयासों के बाद सऊदी अरब से राजूदास का शव जयपुर एयरपोर्ट पर लाया गया। जहां से उसे उसके गांव काशमीर ले जाया गया।
गौरतलब है कि मौत के बाद भी बेटे राजूदास को मिट्टी नसीब नहीं होने पर मां धापु देवी (60) और पत्नी गुड्डी देवी का रो—रोकर बुरा हाल था। घर के सदस्य के शव का इंतजार कर रहे परिजनों ने पिछले तीन महीने से घर में चूल्हा तक नहीं जलाया। यहां तक कि उनके खाने—पीने का इंतजाम भी आसपड़ोस के लोगों की ओर से ही किया जा रहा था। इस मामले को लेकर लगातार अमर उजाला की ओर से राजूदास के परिजनों की पीड़ा को उजागर किया गया था।