संक्रमण से गोवंश की लगातार मौत
केंद्रीय डेयरी विभाग के एक अधिकारी ने बताया, संक्रमण से गोवंश की लगातार मौत के बावजूद कई राज्यों में अब भी इस बीमारी से निपटने में कोताही नजर आ रही है। यह स्थिति तब है जब केंद्र सरकार जरूरी एडवाइजरी से लेकर टीके उपलब्ध कराने तक हर संभव मदद के लिए दिन-रात लगी हुई है। अधिकारी ने दो राज्यों का बिना नाम लिए हुए बताया, ये पशुओं के संक्रमण व टीकाकरण की स्थिति नियमित रूप से केंद्र से साझा नहीं कर रहे हैं। कुछ राज्य वास्तविक आंकड़े कम करके बता रहे हैं।
कोरोना जैसे लक्षण, धीरे-धीरे थम जाती हैं सांसे
क्वारंटीन सेंटर के गो सेवक कुंदन पारीक के अनुसार उन्होंने कुछ गांयों के सीबीसी टेस्ट कराए, तो पता चला कि लंपी के लक्षण भी कोरोना जैसे ही हैं। लंग से शुरू हुआ इन्फेक्शन गले तक पहुंच जाता है, नाक से पानी निकलता है और धीरे-धीरे सांस लेने में परेशानी आने लगती है। गांयों के पांव सूज जाते हैं और शरीर पर बड़े-बड़े घाव हो जाते हैं। कई गांयों की किडनी डैमेज हो रही है।
- बीमार जानवर से स्वस्थ जानवर को दूर रखें।
- बीमार पशु से पहले स्वस्थ पशु पर ध्यान दें। पशुओं को हवादार व जालीदार स्थान पर रखें।
- वायरस मक्खी-मच्छर से फैलता है, इसलिए जानवरों को मक्खी-मच्छर से बचाएं। शाम को जानवरों के पास धुआं करें।
- संक्रमित पशु के दूध का उपयोग किया जा सकता है, उबाल कर उपयोग करें।
- बीमारी का लक्षण दिखते ही पशु चिकित्सक से संपर्क कर दिखाएं और उनकी सलाह से ही इलाज करें।