हिन्दू नव संवत्सर 2074 शुरू हो चुका है। इस संवत्सर को साधारण नाम दिया गया है। ग्रहों के मुताबिक इस संवत्सर की बागडोर मंगल के हाथ में है। मतलब यह कि नवसंवत्सर का राजा मंगल है और उसके केबिनेट में चुनिंदा ग्रहों को जगह मिली है। ऐसा सात साल बाद हुआ है जब मंगल ग्रह को सर्वेसर्वा का पद मिला है। मंगल के केबिनेट में बृहस्पति, सूर्य, शुक्र, बुध और शनि को जगह मिली है।
ज्योतिष के जानकारों की मानें तो नवसंवत्सर 2074 के शुरू होने के साथ ही ग्रहों का नया मंत्रिमंडल भी सक्रिय हो गया है। सभी ग्रहों को अपना अलग विभाग मिला है, जिनका प्रभाव भी देखने को मिल सकता है। नवसंवत्सर 2074 का पहला सावा 18 अप्रैल को होगा। 4 जुलाई को देवशयन है। इससे अगले 4 माह तक कोई सावा नहीं होगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार देवशयन के दौरान मांगलिक कार्य भी नहीं होते हैं। 31 अक्टूबर को देवउठनी एकादशी के अबूझ सावे से फिर मांगलिक काम शुरू होंगे। वर्ष 2017 का पहला सावा 16 जनवरी को था और आखिरी सावा 13 दिसंबर को है। वर्षभर में कुल 66 सावे हैं।
जानिए राजा और उसके मंत्रीमंडल में कौन है शामिल
मंगल: राजा और उद्योग मंत्री : राजा उद्योग मंत्री के पद पर मंगल ग्रह होने से सामान्य वर्षा होगी, सभी जिंस में तेजी होगी। गुड़, चीनी, तेल, घी, पेट्रोल, डीजल, गैस के भावों में उतार-चढ़ाव होते रहेंगे।
गुरु: उपप्रधानमंत्री : मंत्रियों का नेतृत्व गुरु के पास रहेगा। इससे विकास की योजनाएं शुरू होंगी। शिक्षा, रेलवे, हवाई सेवा, सड़क के क्षेत्र में विकास होगा। जनता की शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठान में विशेष रुचि बढ़ेगी।
सूर्य: खाद्य पेट्रोलियम मंत्री : सभी अन्न में मंदी होकर तेजी होगी। वर्ष के बीच प्राकृतिक प्रकोप की संभावना है। दवा, डीजल, पेट्रोल, सोना-चांदी और वाहन महंगे होंगे।
शुक्र :उपखाद्य मंत्री : रबी की फसल का स्वामी शुक्र ग्रह होने से सामान्य वर्षा होगी। वैज्ञानिक अनुसंधान के खाद-बीज के प्रयोग से उत्तम फसल होने की संभावना है।
बुध :जल,कृषि, गृह मंत्री : तीन विभाग का भार बुध ग्रह पर होने से चारा, फल, सब्जी की पैदावार बढ़ेगी। प्रॉपर्टी के दाम गिरेंगे। सभी वर्गों को समानता का अधिकार मिलेगा। महिलाओं का वर्चस्व बढ़ेगा। पुलिस प्रशासन को कड़ी परीक्षा से गुजरना होगा।
ज्योतिष के जानकारों की मानें तो नवसंवत्सर 2074 के शुरू होने के साथ ही ग्रहों का नया मंत्रिमंडल भी:वित्तमंत्रालय : कईराजनेताओंके काले धन रखने के मामले उजागर होंगे। 2016 की तरह इस वर्ष भी बैंकों को संघर्ष के दौर से गुजरना पड़ेगा। नए रोजगार के अवसर मिलेंगे।