अजमेर में थर्ड जेंडर नवजात के शव ढोने की ट्रोली पर मिलने का मामला सामने आया है।
जानकारी के अनुसार जवाहरलाल नेहरु अस्पताल में कार्यरत सफाई कर्मचारी ने यहां मोर्चरी के पास शव ढोने वाली ट्रोली पर बच्चे के रोने की आवाज सुनी। पास जाकर देखा तो एक बच्चा वहां ट्रोली में पड़ा हुआ था। उसने तुरंत अस्पताल के डॉक्टरों को इसकी सूचना दी। इस पर डॉक्टरों ने मासूम को शिशुरोग विभाग में भर्ती करवा दिया। मासूम की जांच में सामने आया कि वह थर्ड जेंडर है। मासूम के हाथ में अस्पताल का कैनुला भी लगा हुआ था। सूचना पर पहुंची कोतवाली थाना पुलिस ने अज्ञात कुमाता और पिता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर शहर के जनाना अस्पतालों का रिकाॅर्ड खंगालना शुरू कर दिया है।
क्या कहता है कानून
वरिष्ठ अधिवक्ता प्रीतम सिंह सोनी से जब इस संबंध में जानकारी चाही तो उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने थर्ड जेंडर को अलग से मान्यता दी है। अब नौकरियों में भी थर्ड जेंडर का कोटा रहेगा। यदि किसी माता—पिता के ऐसी संतान पैदा होती है तो उनका नैतिक कर्तव्य है कि वह उसे पालें। बच्चे को लावारिस छोड़ना न्याय संगत नहीं है।
कानून में बारह वर्ष से कम आयु के बच्चे का परित्याग करना या उसे किसी अरक्षित स्थान पर छोड़ देने वाले व्यक्ति के खिलाफ आईपीसी की धारा 317 के तहत कार्रवाई की जाती है। इसके अर्न्तगत साल सात तक का कठोर कारावास और जुर्माने की सजा का प्रावधान है।