नागौर जिले में राजनीतिक प्रतिष्ठा का सवाल बन रही तांगा दौड़ पर राज्य सरकार को राहत नहीं मिली। राजस्थान हाईकोर्ट की विशेष खंडपीठ में जस्टिस गोविन्द माथुर व जस्टिस निर्मलजीत कौर ने राज्य सरकार की रिव्यू पिटीशन को खारिज कर दिया।
राज्य सरकार की ओर से दायर रिव्यू पिटीशन में आज पैरवी के लिए भारत सरकार के एडिशनल सॉलीसिटर जनरल पीएस नरसिम्हा व एएजी शिवमंगल सिंह और एएजी श्याम सुंदर लादरेचा ने पक्ष रखा। वहीं, अप्रार्थी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजेश जोशी ने पक्ष रखा। एडिशनल सॉलीसिटर जनरल पीएस नरसिम्हा ने कहा कि आमजन की लोक भावना को देखते हुए तांगा दौड़ कराने की अनुमति दी जाए। वहीं, अप्रार्थी के अधिवक्ता जोशी ने कहा कि तीन अगस्त को ही राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर एसएलपी में एक शपथ पत्र पेश किया है ऐसे में अनुमति कैसे दी जा सकती है। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद राज्य सरकार की रिव्यू पिटिशन को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट में दायर एसएलपी में ही पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं।
गौरतलब है कि एनिमल वेल्फेयर बोर्ड ऑफ इंडिया चैन्नई ने तांगा दौड़ को पशुओं के साथ क्रूरता की श्रेणी में माना था। जिस पर महावीर विश्नोई की ओर से जनहित याचिका दायर की थी और वरिष्ठ न्यायाधीश गोविंद माथुर व न्यायाधीश निर्मलजीत कौर की खंडपीठ ने 6 जनवरी 2016 को तांगा दौड़ पर रोक लगाते हुए आदेश पारित किया था। गणेश चतुर्थी, तेजा दशमी व बालापीर मेला व जुब्बा शरीफ के मेले में नागौर जिले के खरनाल व मुन्दियाड में होने वाले तांगा दौड़ पर रोक लगाई थी।