कभी फूलनदेवी, जगजीवन परिहार, पानसिहं तोमर, मानसिंह, निर्भयसिंह गुर्जर जैसे खूंखार डकैतों की शरण स्थल रहे चंबल के बीहड़ों में इन दिनों राजस्थान के नामी-गिरामी नेता जाने को मजबूर हैं। यह भी सभी जानते हैं कि इस दुर्गम क्षेत्र में पुलिस भी जाने से थर्राती थी।
धौलपुर उप चुनाव के चलते इन दिनों यहां बसे गांवों में प्रदेश के राजनीतिक दिग्गज डेरा डाले हुए है। वसुंधरा सरकार के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन चुके इस उपचुनाव को जीतने के लिए पार्टी और सरकार के मंत्रियों ने पूरी ताकत झोंक दी है। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष और मुख्यमंत्री वसुंधरा के प्रमुख सिपेहसलार अशोक परनाम चुनाव प्रचार के लिए पिछले कई दिनों से चंंबल के बीहड़ों में बसे गांवों में जनसम्पर्क के लिए जा रहें है।
वहीं कई कांग्रेसी नेता भी डाकुओं के लिए बदनाम रहें गांवों में जनसम्पर्क कर रहें है। जहां एक ओर तपते बीहड़ नेताओं के लिए परेशानी बन रहें है वहीं दूसरी ओर सियासी पारा भी तेजी से चढ़ रहा है। मतदान की तिथि नजदीक आते—आते कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप—प्रत्यारोप भी बढ़ रहा है।
माना जा रहा है कि वसुंधरा राजे भी एक अप्रेल से धौलपुर में चुनाव प्रचार के लिए पहुंच रही हैं। उसके बाद चुनावी सरगर्मी और बढ़ेगी। वहीं भाजपा ने चुनाव प्रचार के लिए अब स्थानीय लोक कलाकारों को भी मैदान में उतार दिया है।
स्थानीय गीतों के माध्यम से ये कलाकार भाजपा प्रत्याशी शोभारानी कुशवाह के लिए वोट मांग रहें है। वहीं कांग्रेस प्रत्याशी कांग्रेसी दिग्गज बनवारी लाल शर्मा जातिगत समीकरणों के आधार पर स्वयं की चुनावी नैय्या पार करने की जुगत में है। वहीं राज्य की राजनीति को करीब से जानने वाले विश्लेषक कहते है कि यह कह पाना मुश्किल है कि जीत का उंट किस करवट बैठेगा।
इस सीट से पूर्व डकैत जगन गुर्जर की पत्नी भी निर्दलीय चुनाव लड़ रही हैं। जगन ने आत्मसमर्पण कर दिया था और हाल ही वह वह बरी हुआ है और पत्नी के लिए चुनाव प्रचार कर रहा है।