राजस्थान की राजधानी जयपुर में आयोजित हो रहे पांच दिवसीय लिटरेचर फेस्टिवल में साहित्य के दिग्गजों का आना जारी है। आज यहां प्रसिद्ध लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता सुधा मूर्ति ने भी अपने जीवन के अनुभव साझा किए।
जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में सुधा मूर्ति ने अपनी जिंदगी और किताबों के बारे में चर्चा को आगे बढ़ाया। मूर्ति ने बताया कि जब वे देवदासी प्रथा को खत्म करने के लिए काम कर रही थीं तब वे काफी मॉर्डन पहनावे से ताल्लुक रखती थीं। इसी दौरान जब लोगों के बीच पहुंची तो उन पर एक बार चप्पल और दूसरी बार टमाटर फेंके गए थे। इसके बाद जब उन्होंने अपने पिता से इस बारे में कहा और पूछा कि ऐसा क्यों हुआ? इस पर पिता ने कहा कि सबसे पहले तो अपना रूप बदलो। जब हम आम लोगों के लिए काम करना चाहते हैं तो हमें भी उनकी तरह नजर आना जरूरी है।
सुधा मूर्ति ने बताया कि इसके बाद उन्होंने अपने पिता की बात मानी और हजारों देवदासियों को मुक्त करवाया।