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मुझ पर फेंकी गई थी चप्पल और टमाटर, JLF में सुधा मूर्ति ने साझा किए अनुभव

Fri, 26 Jan 2018 07:06 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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सुधा मूर्ति
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राजस्थान की राजधानी जयपुर में आयोजित हो रहे पांच दिवसीय लिटरेचर फेस्टिवल में साहित्य के दिग्गजों का आना जारी है। आज यहां प्रसिद्ध लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता सुधा मूर्ति ने भी अपने जीवन के अनुभव साझा किए।
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जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में सुधा मूर्ति ने अपनी जिंदगी और किताबों के बारे में चर्चा को आगे बढ़ाया। मूर्ति ने बताया कि जब वे देवदासी प्रथा को खत्म करने के लिए काम कर रही थीं तब वे काफी मॉर्डन पहनावे से ताल्लुक रखती थीं। इसी दौरान जब लोगों के बीच पहुंची तो उन पर एक बार चप्पल और दूसरी बार टमाटर फेंके गए थे। इसके बाद जब उन्होंने अपने पिता से इस बारे में कहा और पूछा कि ऐसा क्यों हुआ? इस पर पिता ने कहा कि सबसे पहले तो अपना रूप बदलो। जब हम आम लोगों के लिए काम करना चाहते हैं तो हमें भी उनकी तरह नजर आना जरूरी है।

सुधा मूर्ति ने बताया कि इसके बाद उन्होंने अपने पिता की बात मानी और हजारों देवदासियों को मुक्त करवाया।
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कॉलेज में लड़के कागज फेंका करते थे

सुधा मूर्ति
अपने कॉलेज के अनुभव साझा करते हुए सुधा मूर्ति ने बताया कि वे अपने कॉलेज में एक अकेली लड़की थी। इसके चलते कॉलेज में लड़के उन्हें एक अजूबे की तरह देखते थे। लड़के उनसे बात नहीं करते थे। उल्टे उन पर कागज फेंककर सताया करते थे। इसके बावजूद वे उन पर किसी तरह का कोई रिएक्शन नहीं देती। सुधा मूर्ति ने बताया कि जब उन्होंने कॉलेज में टॉप किया तो उन्हें स्वीकार कर लिया गया।

उन्होंने यहां जेएलएफ में आए श्रोताओं से कहा कि जब आप किसी की सहायता करना चाहते हैं तो किसी भी सम्मान या सहायता की उम्मीद मत कीजिए। इस दौरान केवल आपके शब्द और आपकी मुस्कान भी किसी की सहायता कर सकती है। सुधा मूर्ति ने यहां किताबों को ही सबसे बड़ा गिफ्ट बताया।
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