जयपुर के जेएलएन मार्ग पर सड़क पार करता पैंथर
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अलवर के सरिस्का में एक पैंथर को लोगों की भीड़ ने जला दिया। इसी इलाके में सात लोग पैंथर के हमले में मारे जा चुके हैं। राजधानी जयपुर की सड़कों पर पैंथर फैमिली नजर आती है। उदयपुर के एक स्कूल में पैंथर बार-बार आ-जा रहा है। ये घटनाएं हाल ही की है। आखिर क्या वजह है कि एकाएक पैंथर जंगल छोड़कर इंसानी बस्तियों की रूख कर रहे है।
इन सवालों का जबाव टटोलने के लिए जब वाइल्ड लाइफ एक्सपर्ट्स से बातचीत की तो कई चौकाने वाले तथ्य सामने आए। फॉरेस्ट डिपोर्टमेंट की लापरवाही तो सामने आई ही साथ जंगल की हैल्थ बिगड़ने का भी दावा इन एक्सपर्ट्स ने किया। अगर बात सरिस्का की की जाए तो यहां पैंथर के हमलों की घटनाएं यहां टाइगर की आबादी बढ़ने साथ बढ़ी है।
खुद की जान बचाने के लिए आबादी की ओर आते हैं पैंथर
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जानकारों की मानें तो सरिस्का में टाइगर का प्रभुत्व बढ़ने से पैंथरों का जंगलों से पलायन हो रहा है। इसे यूं भी कह सकते है कि जान बचाने के लिए पैंथर लगातार आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रूख कर रहे है। टाइगर की टैरेट्री करीब 40 किमी होती है। वह किसी का दखल अपने इलाके में पसंद नहीं करता। ऐसे में पैंथर सुरक्षित स्थान की तलाश में आबादी वाले इलाकों के पास आ रहे है। 850 वर्ग किलोमीटर में फैले सरिस्का में फिलहाल 14 बाघ है।
रिटायर्ड डीएफओ सुनयन शर्मा कहते है कि मानव और वाइल्ड लाइफ के बीच संघर्ष की एक और बड़ी वाइल्ड लाइफ के नैचर में आ रहा बदलाव है। जंगल से सटे इलाकों में विकास के साथ शोरगुल बढ़ा है। वाहनों की आवाजाही बढ़ी है। इससे वाइल्ड लाइफ डिस्टर्ब होती है। उनमें चिडचिड़ापन भी आता है। शांति पंसद वाइल्ड लाइफ मनुष्य को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मान रही है। इससे आबादी इलाकों में पैंथर नजर आने और ग्रामीणों पर हमला करने की घटनाएं बढ़ी है।
इंसानों पर हमला नहीं करते पैंथर
पाली के जवाई में इंसानी बस्तियों के आस पास अक्सर पैंथरों को विचरण करते देखा जा सकता है
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पैंथर कभी भी इंसानों पर यूं ही हमला नहीं करते लेकिन अपने क्षेत्र में इंसानों का दखल उन्हें बिल्कुल भी पसंद नहीं आता और फिर वो इंसानों पर हमला करने से भी नहीं चूकते । उदाहरण के तौर पर राजस्थान के पाली जिले में स्थित जवाई गांव को ही देख लीजिए जहां इतने सालों से पैंथर और इंसान आराम से अपना जीवनयापन कर रहे हैं। जयपुर के झालाना इलाके में हुई ताजा घटना भी इसी बात का सबूत देती है कि इंसानों के दखल देने के कारण पैंथरों को उनके रहने के लिए उचित वातावरण नहीं मिल रहा है। यहां इंसानी आबादी लगातार जंगल की तरफ बढ़ रही है।