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कुछ इस तरह लिखी गई थी सोहराबुद्दीन एनकाउंटर की पटकथा

Tue, 01 Aug 2017 03:17 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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फाइल फोटो
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देश के काफी उलझे हुए केसों में से एक माने जाने वाले सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में अफसरों से लेकर मंत्री तक सीबीआई के घेरे में आ गए थे। सीबीआई की चार्जशीट के मुताबिक सोहराबुद्दीन के एनकाउंटर की कहानी कुछ यूं तय की गई थी...
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तीन राज्यों का मोस्ट वॉन्टेड अपराधी सोहराबुद्दीन शेख गुजरात पुलिस की चाल में आसानी से फंसता नहीं दिख रहा था और पुलिस को उसे कैसे न कैसे करके किसी नए इल्जाम में फंसाना था, लेकिन एक ही शख्स ऐसा था जो उसे गुजरात लेकर आ सकता था वो था आईपीएस अभय चुड़ास्मा।

कहा जाता है कि सोहराबुद्दीन अभय चुड़ास्मा का पैदा किया हुआ गैंगस्टर है और उसी के इशारों पर वो कारोबारियों से पैसा वसूला करता था। अभय चुड़ास्मा ने ही सोहराबुद्दीन से संपर्क कर उसे गुजरात के एक कारोबारी रमन पटेल से उगाही करने के बहाने गुजरात बुलाया, लेकिन सोहराबुद्दीन ने अपने दो साथी सिलवेस्टर और तुलसी प्रजापति को कारोबारी रमन पटेल से उगाही करने के लिए भेज दिया।
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सिलवेस्टर और तुलसी ने रमन पटेल पर गोली चला दी और इसके साथ ही पुलिस का काम आसान हो गया और सोहराबुद्दीन पर नामजद रिपोर्ट दर्ज हो गई। सोहराबुद्दीन ये बात भी समझ गया कि आईपीएस चुड़ास्मा उसको धोखा देने की कोशिश कर रहा है, इसलिए सोहराबुद्दीन लंबे समय के लिए पिक्चर से बाहर हो गया।

यहां पुलिस के फंदे में सोहराबुद्दीन का प्यादा तुलसी फंस गया और उसने पुलिस को सोहराबुद्दीन का पता दे दिया।

फिल्मी स्टाइल से छोड़ा तुलसी को, फिर किया सोहराबुद्दीन का एनकाउटंर

डेमो इमेज
चार्जशीट के अनुसार 22 नवंबर 2005 के दिन सोहराबुद्दीन शेख अपनी पत्नी कौसरबी और साथी तुलसी प्रजापति के साथ हैदराबाद में था। राजस्थान पुलिस और गुजरात एटीएस की टीम ने तीनों को हैदाराबाद के सांगली से पकड़ा और गांधीनगर के डीशा ले आए, जहां उन्होंने तीनों को एक फार्महाउस पर ले जाकर रखा।

बाद में यहां से पुलिस सोहराबुद्दीन और तुलसी प्रजापति को तो अपने साथ ले गई, लेकिन सोहराबुद्दीन की बीवी कही जाने वाली कौसरबी को यहां एक कमरे में बंद कर दिया गया। फिर 26 नवंबर 2005 को अहमदाबाद के विशाला सर्किल के पास ही स्थित टोल नाके पर सुबह करीब 4 बजे गुजरात एटीएस के मुखिया डीजी वंजारा और राजस्थान के उदयपुर जिले के एसपी और वर्तमान में एसओजी के आईजी दिनेश एम.एन ने इस एनकाउंटर की पूरी कहानी रची।

चार्जशीट के अनुसार इस कहानी में सबसे पहले कांस्टेबल अजय परमार को पुलिस अधिकारियों ने आदेश दिए कि वो गुजरात एटीएस मुख्यालय की पार्किंग में खड़ी एक बाइक लेकर आए, जिसके बाद सोहराबुद्दीन को भी वहीं लाया गया।

एक टीम में शामिल राजस्थान पुलिस के एक कांस्टेबल को कहा गया कि वो मोटरसाइकिल पर बैठकर जाए और अचानक उससे छलांग लगा दे। कांस्टेबल के बाइक से छलांग लगाते ही, पुलिस ने सोहराबुद्दीन को भी चलती कार से धक्का दे दिया। इसके बाद वो सड़क पर गिर गया। बाइक से कूदे कांस्टेबल को भी चोटें आईं, वहीं सोहराबुद्दीन को भी सड़क पर गिरने से चोट लगी।

इतने में ही पुलिस ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर से फायर करते हुए सोहराबुद्दीन के सीने में करीब 8 गोलियां उतार दी। पुलिस ने बाद में उसे ​सिविल अस्पताल भी भिजवाया ताकि इस पूरे मामले को एनकाउंटर को रुप दिया जा सके।

कौसरबी की मौत बन गई थी रहस्य

फाइल फोटो
सोहराबुद्दीन शेख, तुलसी प्रजापति और कौसरबी को फार्महाउस पर लेकर आने के बाद 26 नवंबर 2005 के दिन सोहराबुद्दीन को वहां से पुलिस ले गई, जबकि कौसरबी और तुलसी को पुलिस ने कमरे में बंद कर दिया था। कहा जाता है कि सोहराबुद्दीन के एनकाउंटर का राज उसकी बीवी कौसरबी ही खोल सकती थी, ऐसे में राजनीतिक अमले से लेकर पुलिस अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ था।

पुलिस कौसरबी को गुमशुदा ​बताकर मामले पर थोड़ा पर्दा डालना चाह रही थी। लेकिन सीबीआई की रिपोर्ट के अनुसार एटीएस के अ​धिकारियों ने उसे रास्ते से हटाने के लिए जलाकर मार डाला था।
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ताबूत की आखिरी कील बन सकता था तुलसी, उसका भी एनकाउंटर

फाइल फोटो
चार्जशीट के अनुसार सोहराबुद्दीन एनकाउंटर का आखिरी गवाह तुलसीराम प्रजापति का एनकाउंटर पुलिस द्वारा इस केस में लगाई गई, ताबूत की आखिरी कील साबित हुआ। सोहराबुद्दीन के एनकाउंटर के समय पुलिस ने अपना गवाह बनाकर प्रजापति को छोड़ दिया था। बाद में फिर उसे किसी दूसरे मामले में फिर से गिरफ्तार किया गया।

उस समय सुप्रीम कोर्ट ने सोहराबुद्दीन मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी। सीबीआई का आरोप है कि अब पुलिस को ये डर सता रहा था कि कहीं तुलसी ने सीबीआई के सामने सच बता दिया तो। चार्जशीट के अनुसार ऐसे में पुलिस ने एक और एनकाउंटर की साजिश रची और तुलसी प्रजापति का गुजरात के बनासकांठा जिले में एनकाउंटर कर दिया गया।

ये एनकाउंटर सोहराबुद्दीन एनकाउंटर के ठीक एक महीने बाद हुआ। उस समय बनासकांठा में डीजी वंजारा की पोस्टिंग भी थी। पुलिस ने अपनी सफाई में कहा था कि तुलसी ने अपने एक साथी के साथ मिलकर पुलिस पार्टी की आंखों में मिर्च पाउडर डाल दिया और गोलियां चलाईं, जवाबी कार्रवाई में पुलिस को उसे मारना ही पड़ा।
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