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सोहराबुद्दीन केस: सलाखों के पीछे चले गए थे अमित शाह, निर्वासित जीवन भी बिताया

Tue, 01 Aug 2017 02:34 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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अमित शाह - फोटो : amar ujala
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बहुचर्चित सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले ने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया था। इस एनकाउंटर मामले ने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह तक को सलाखों के पीछे पहुंचा दिया था और निर्वासित जीवन बिताने को मजबूर कर दिया था।
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वर्ष 2005 को गुजरात में हुए इस एनकाउंटर की जांच सीबीआई को सौंपने के बाद 35 लोगों को आरोपी बनाया गया था। जिसमें गुजरात के तत्कालीन गृह राज्य मंत्री और वर्तमान में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी सम्मलित थे। जब मामले की तपिश बढ़ने लगी तो वर्ष 2010 जुलाई में अमित शाह ने अहमदाबाद में सरेंडर कर दिया।

इसके बाद तीन माह तक शाह जेल में रहे। अमित शाह पर हत्या, अपहरण, आपराधिक षड़यंत्र और वसूली सहित कई संगीन आरोप थे। लेकिन वर्ष 2010 अक्टूबर में शाह को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई। शाह को गुजरात नहीं जाने की शर्त पर जमानत दी गई थी।
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लंबे समय बाद मिली इन्हें राहत

डीजी वंजारा और दिनेश एम एन
अदालत के फैसले के बाद अमित शाह ने करीब दो वर्ष तक दिल्ली में ​निर्वासित जीवन बिताया। वर्ष 2012 के गुजरात विधानसभा चुनाव से पूर्व कोर्ट ने उन्हें गुजरात जाने की ईजाजत दे दी थी।

फिर, ​उन्होंने चुनाव लड़ा और वे पुन: ​गुजरात विधानसभा के सदस्य बने। अमित शाह के अतिरिक्त राजस्थान के कैडर के आईपीएस दिनेश एम.एन. और गुजरात कैडर के आईपीएस डी.जी. वंजारा भी सोहराबुद्दीन केस में सात वर्ष से अधिक समय तक जेल में रहे हैं।

जहां अमित शाह को इस केस में वर्ष 2014 में क्लीन चिट मिल गई थी। वहीं आईपीएस दिनेश एम.एन. व डी.जी. वंजारा को आज कोर्ट ने बरी कर दिया।
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