गाय को सांस के जरिए अॉक्सीजन छोड़ने वाला एकमात्र जीव बतानेवाले राजस्थान के शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी का विवादों से पीछा नहीं छूट रहा है। इस बार पंडितों को लेकर दिए एक बयान के चलते देवनानी फिर फंस गए हैं। ब्रह्मणों को लेकर उनके एक बयान पर ब्राह्मण समाज में खासा आक्रोश है और वे उनसे इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी ने जयपुर के इन्द्रलोक सभागार में ब्राह्मणों पर टिप्पणी कर दी। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण बिना डिग्री के पण्डित क्यों लगाते हैं? इसके बाद से ही प्रदेशभर में उनके इस बयान का ब्राह्मण समाज की ओर से विरोध शुरू हो गया है। अजमेर में सोमवार को ब्राह्मण समाज के लोगों ने प्रदर्शन किया और उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कलक्ट्रेट पर हुए इस प्रदर्शन में के बाद लोगों ने कलक्टर को राज्यपाल, मुख्यमंत्री व प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन भी सौंपा। जिसमें देवनानी को मंत्री पद से हटाने की मांग की है।
प्रदर्शन कर रहे लोगों का नेतृत्व कर रहे योगेन्द्र ओझा का आरोप है कि देववानी के नाम के आगे प्रोफेसर लगाने के संबंध में दायर याचिका ब्राह्मण व्यक्ति ने लगाई है। इस याचिका पर कोर्ट ने उनसे तथा राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। ऐसे में दुर्भावना के चलते उन्होंने पंडितों के लिए आपत्तिजनक बयानबाजी की।
इधर, जयपुर में भी सर्व ब्राह्मण महासभा के प्रदेशाध्यक्ष पण्डित सुरेश मिश्रा ने देवनानी के द्वारा दिए गए बयान के लिए माफी मांगने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि ऐसे मंत्रियों को तुरन्त प्रभाव से बर्खास्त किया जाना चाहिए।
विवाद बढ़ता देख रात को देवनानी ने बयान दिया कि वे पं. दीनदयाल उपाध्याय के आदर्शों पर चलनेवाले भाजपा के कार्यकर्ता हैं और वे पंडितों व विद्वानों का हमेशा सम्मान करते हैं। उनका कहना है कि राजनीतिक द्वेषता रखनेवाले लोग उनके खिलाफ षड़यंत्र रच रहे हैं।
गौरतलब है कि अजमेर में अकबर किले का नामकरण अजमेर किला करने और अपने नाम के आगे प्रोफेसर लगाने समेत कई मामलों को लेकर वे विवादों में रह चुके हैं।