सीएम अशोक गहलोत ने कहा, पूनिया साहब बड़ी-बड़ी सिद्धांत की बात कर रहे थे, मैं सुन रहा था। उनमें कोई दम नहीं है। गहलोत बोले, अगर दम है पूनिया साहब, आप तो अध्यक्ष भी हो, अध्यक्ष का एक रुतबा और सब लोग आपकी रेस्पेक्ट भी करते हैं। यह पद बीजेपी में पूरे राजस्थान का बहुत बड़ा पद होता है, मैं जानता हूं मैं तीन बार रहा हूं यहां पर, मैं जानता हूं पद की क्या गरिमा है। क्या आप प्रधानमंत्री को जाकर कहेंगे और क्या वो आपकी बात नहीं सुनेंगे। लेकिन आप लोगों ने नहीं कहा, उस कारण पीएम ने दौसा में जो बातें बोलीं और राजस्थान वासियों को गुमराह किया है कि एक नई बात छेड़ दी। गहलोत बोले, पीएम मोदी ने मध्यप्रदेश-राजस्थान को मिलाकर नई बात छेड़ दी कि पार्वती-कालीसिंध-चम्बल को मिलाकर ईआरसीपी की नई योजना बना देनी चाहिए, तब हम विचार करेंगे।
सीएम बोले, क्या विचार करेंगे, क्या ये योजना मैंने बनाई है। रिफाइनरी मैंने बनाई थी, उसको तो आपने वसुंधरा जी के टाइम पर बंद कर दिया। पांच साल नहीं चलने दिया, जिस कारण आज 40 हजार का प्रोजेक्ट 70 हजार का हो गया। कौन दोषी है? आप दोषी हो और आपकी पार्टी दोषी है। मुझे इसका जवाब दें कि ईआरसीपी को वसुंधरा राजे ने कंसीव किया था। राजस्थान और मध्यप्रदेश की 2005 में मीटिंग हुई, फिर जो समझौता हुआ उसको आधार बनाकर के ही यह योजना बनाई गई। 25 अगस्त 2005 को हुई बैठक में निर्णय किया गया कि राज्य किसी परियोजना के लिए अपने राज्य के कैचमेंट से प्राप्त सम्पूर्ण पानी और दूसरे राज्य के कैचमेंट का 10 प्रतिशत पानी इस्तेमाल कर परियोजना बना सकते हैं। इसके आधार पर योजना बनाई गई। मध्यप्रदेश ने अपना बांध बना लिया। इंटरनेशनल एजेंसियों से फंडिंग ले ली। राजस्थान सरकार ने उनको एनओसी भी दे दी। अब हमारा वक्त जब ईआरसीपी में आ रहा है, तो योजना पूरी करने में अड़चनें क्यों पैदा की जा रही है, समझ से परे है। राजस्थान की जनता आप लोगों को कभी माफ नहीं करेगी। इतनी शानदार योजना को क्यों बंद करना चाह रहे हो।
आप जानते हो पीएम के सलाहकार कौन हैं?
गहलोत बोले, पीएम ने जो सुझाव दिया है, उसके मुताबिक ईआरसीपी जो वसुंधरा जी ने बनाई है उसमें तीन हजार 500 मिलियन क्यूसेक मीटर पानी चाहिए। जबकि नई योजना जो पीएम बता रहे हैं, किसकी सलाह से बता रहे हैं मुझे नाम लेने की जरूरत नहीं है। गहलोत ने विपक्षी विधायकों से कहा, आप जानते हो इस काम के लिए उनके सलाहकार कौन हैं? उसमें आधा पानी 1775 मिलियन क्यूसेक मीटर पानी ही 13 जिलों को मिलेगा। क्या आप चाहेंगे हमें आधा ही पानी मिले, क्या आप उसे स्वीकार करोगे? स्वीकार करोगे, तो जनता को बताओ क्यों, आप लोग क्या चाहते हैं? कर्नाटक में ऊपरी भद्रा प्रोजेक्ट की लागत 21,450 करोड़ है, उसे राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा देने की मांग की गई थी। राष्ट्रीय दर्जा तो नहीं दिया 2022-23 के बजट में आपकी सरकार ने 5300 करोड़ रुपये दिए, राजस्थान के लिए जीरो। हम रख रहे हैं साढ़े नौ हजार करोड़ रुपये। इस बार मैंने उसे बढ़ाकर 13,500 करोड़ रुपये रख दिए।
आधा पानी नहीं मिलेगा और दो लाख हेक्टेयर जमीन की सिंचाई नहीं हो सकेगी...
गहलोत बोले, नई बात सुनिए दो लाख हेक्टेयर सिंचाई का पानी नहीं मिलेगा। पीएम के नए सुझाव के मुताबिक आधा पानी और दो लाख हेक्टेयर जमीन की सिंचाई नहीं हो सकेगी। नए सुझाव में 26 की बजाय सिर्फ 13 बांधों में ही पानी मिलेगा। ये भी नहीं कहा कि पैसा भारत सरकार देगी, वो कहते हैं मध्यप्रदेश से बात करो, हम क्यों बात करें? ये हमारे स्टेट का पानी का विषय है, हम अपना काम आगे बढ़ा रहे हैं। बाड़ी से आने वाले विधायक ने ठीक कहा पानी हमारा, आधी जगहों में बाढ़ से नुकसान हमारा हो रहा है और आधे जिलों में हम लोग प्यासे रह रहे हैं और परमिशन मध्यप्रदेश से लेवें। जबकि मध्यप्रदेश का एग्रीमेंट हुआ है।
राज़ को राज़ ही रहने दो - राजेंद्र राठौड़
गहलोत ने विपक्ष से अध्यक्ष के जरिए सवाल पूछते ईआरसीपी के मुद्दे पर एमपी से परमिशन लेने की पीएम की बात पर कहा, अध्यक्ष महोदय ये राज क्या बताइए, चूरू से आने वाले विधायक (राजेंद्र राठौड़) आप बता सकते हो, राजेंद्र राठौड़ बोले, राज़-राज़ ही है। राज़ को राज़ ही रहने दो। तो गहलोत बोले, वो आप कहोगे, हम क्यों रहने देंगे। हम तो कहेंगे, क्योंकि वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री नहीं रहीं, तो कंसीव की हुई योजना है। जानबूझकर आप इस योजना को आगे नहीं बढ़ाना चाहते हो। विधानसभा अध्यक्ष डॉ सीपी जोशी बोले, वो भी यही चाहते थे कि आप बोलो। तो गहलोत बोले, अध्यक्ष महोदय आपने बिल्कुल ठीक कहा, आप उनकी नेचर जानते हो। ये तो मानेंगे न, एमपी ने अपने राज्य में इसी निर्णय के आधार पर नेवज नदी पर मोहनपुरा बांध और कालीसिंध नदी पर कुण्डल्या बांध का निर्माण किया है। परियोजना के लिए एक्सटर्नल एजेंसीज से लोन के लिए जरूरी होने पर परियोजना पूरी होने के बाद राजस्थान से एनओसी ली है और आपने दी है। ये एनओसी पूर्ववर्ती भाजपा सरकार की ओर से ही जारी की गई। आपने बड़ी समरसता उनके साथ दिखाई। क्योंकि भाई-भाई हैं, वो भी सरकार वहां पर आपकी थी।
कोरोना को तो बख्शते, हमने आपको सबको साथ लिया - गहलोत
सीएम गहलोत बोले, आमेर से आने वाले सदस्य (सतीश पूनिया) ने कोरोना को लेकर भी सरकार की आलोचना कर दी, कम से कम इसे तो बख्शते। क्योंकि हमने आपको सबको साथ लिया। अभी तक मैं बोलता हूं, इंटरव्यू देता हूं तो विपक्ष के साथियों की चर्चा करता हूं। टीवी वालों को इंटरव्यू दिया तो मैंने कहा हमने सबने मिलकर मुकाबला किया, आपने इसमें भी मीन मेख निकाल दी। आप भूल जाते हो क्या, गंगा नदी किनारे पड़ी लाशें भूल जाते हैं आप लोग, क्या नहीं किया आप लोगों ने, ऑक्सीजन कमी से जितने लोग मरे हैं। केंद्र सरकार को ये देश माफ नहीं कर सकता है। इतने लोग ऑक्सीजन की कमी से मरे हैं। कोई तैयारी नहीं रखी। दूसरी लहर आ गई। समझ नहीं पाए कि दूसरी लहर आ सकती है।
राहुल गांधी ने फरवरी-मार्च 2020 में कह दिया था कुछ भी हो सकता है। सम्भल के चले भारत सरकार, उन्होंने चेतावनी दी थी। अगर उनकी बात को गम्भीरता से लेते तो शायद इतनी मौतें नहीं होती। मुझे पता नहीं कारण क्या है। गुजरात में एक उदाहरण पेश हुआ। मरीज बाहर कारों के अंदर, ट्रकों या बसों के अंदर, एम्बुलेंस के अंदर बाहर बैठे-बैठे ड्रिप लगवा रहे थे। गहलोत बोले, मेरे भी 12 ड्रिप लगी है, मेरे न्यूमोनिया हो गया था। मुझे पता है ड्रिप लगना किसे कहते हैं। वहां सड़कों पर ड्रिप लग रही थी, दुनिया गुजरात को देख रही थी। मैंने यह भी कहा वैक्सीन के पैसे मत लो, इसे फ्री करवाइए। बाद में दबाव पड़ा तो मजबूर होकर फ्री करना पड़ा।