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वर्षों बाद यहां घोड़ी पर बैठा कोई दूल्हा, यह रहा है कारण...

Fri, 24 Nov 2017 10:50 AM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
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दलित दूल्हा
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सामाजिक कुरीतियों में जकड़े समाज को अभी इनसे बाहर निकलने में शायद और समय लग सकता है। विशेषकर राजस्थान जैसे प्रदेश में जहां बाल विवाह और छुआछत जैसी कुप्रथा अभी तक ग्रामीण परिवेश का अहम हिस्सा है। ऐसा ही कुछ अजमेर के अरई गांव में वर्षों से देखने को मिल रहा है।
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इस गांव में कोई दलित दूल्हा घोड़ी पर बैठकर दुल्हन को ब्याहने नहीं जाता है। सवर्ण समाज की दबंगई के चलते दलित दूल्हे को पैदल ही जाना होता है। लेकिन बृहस्पतिवार को दूल्हे प्रधान बैरवा घोड़ी पर भी चढ़ा और गाजे बाजे उसकी बिंदौरी भी निकली। वर्षों बाद यहां एेसा हुआ कि किसी दलित दूल्हे की बारात इस तरह निकली हो।
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प्रशासन ने उपलब्ध कराई सुरक्षा

फाइल फोटो।
प्रधान बैरवा का शादी में एेसा हुआ क्योंकि मुख्य कारण रहा पुलिस प्रशासन का सहयोग। दरअसल अरई के सरवर निवासी प्रधान बैरवा व उसके परिवार को कुछ ग्रामीणों ने धमकी दी थी कि वह घोड़ी पर चढ़कर गांव में ​बिंदौरी नहीं निकाले।

इसकी शिकायत दलित समाज की ओर से प्रशासन के अधिकारियों को दी गई। जिसके बाद पुलिस सुरक्षा में दलित समाज का दूल्हा घोड़ी पर चढ़ सका।
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