राजस्थान हाईकोर्ट ने पुलिस प्रशासन को आदेश दिए हैं कि वह याचिकाकर्ता वरिष्ठ नागरिक को सुरक्षा मुहैया कराए। इसके साथ ही अदालत ने वरिष्ठ नागरिक कल्याण अधिनियम, 2007 के प्रावधानों को लागू करने को कहा है। न्यायाधीश वीके व्यास की एकलपीठ ने यह आदेश मोहनलाल नामा की ओर से दायर याचिका का निपटारा करते हुए दिए।
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जान का खतरा सिर्फ एक बार ही पैदा होने वाला नहीं है। ऐसे में यदि पुलिस को एक बार शिकायत गलत पाई जाती है तो भी अगली शिकायत को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।
याचिका में अधिवक्ता विमल चौधरी ने अदालत को बताया कि मोती डूंगरी इलाके में रहने वाले याचिकाकर्ता ने आम रास्ते पर अतिक्रमण को लेकर जनहित याचिका लगाई थी। इसके बाद कुछ लोगों ने गत वर्ष जनवरी माह में उन पर हमला कर दिया। घटना को लेकर मोतीडुंगरी थाने में नामजद शिकायत भी दर्ज कराई गई, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। आरोपियों के दवाब के चलते याचिकाकर्ता कई माह तक घर से दूर रहा। ऐसे में याचिकाकर्ता को सुरक्षा मुहैया कराई जाए।