आरटीआई एक्टिविस्ट और मजदूर किसान शक्ति संगठन के कार्यकर्ता निखिल डे को एक केस में चार माह कैद की सजा सुनाई गई है। अजमेर के किशनगढ़ मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 19 वर्ष पुराने मामले में डे के साथ पांच लोगों को सजा सुनाई हैं।
इन सभी को आईपीसी की धारा 323 व 451 तहत दोषी पाया गया है। मामले में फैसला सुनाते हुए जज ने कहा कि अभियुक्त सामाजिक कार्यकर्ता व श्रमिक है इसलिए इसे नरमी से देखा जा रहा है और उन्हें चार माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई जाती है।
दरअसल मामला मई 1998 का है जब क्षेत्र की हरमाड़ा पंचायत के तत्कालीन सरपंच प्यारेलाल के घर में निखिल डे, नोरती बाई, बाबूलाल, छोटूलाल व रामकरण के विरुद्ध जबरदस्ती घुसने व परिवारजनों को डराने—धमकाने का ममाला दर्ज कराया था।
वहीं फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्ति करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा राय का कहना है जिस तत्कालीन सरंपच के केस में यह निर्णय दिया गया है उस पर भ्रष्टाचार के आरोप थे। इन लोगों के अनुसार वर्ष 1998 में फरवरी—मार्च में उक्त सरपंच से विभिन्न कार्यों के दस्तावेज मांगने के लिए उन्होंने काफी प्रयास किए। जब वह सफल नहीं हुए तक स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ वह तत्कालीन सरपंच प्यारेलाल के घर गए थे।
डे के अनुसार सरपंच उस दिन घर पर ही था और मोटरसाइकिल साफ कर रहा था। उन्होंने बताया कि मारपीट उनके साथ की गई थी। लेकिन उन्होंने कोई एफआईआर दर्ज नहीं कराई। इसके उलट सरपंच के भाई ने यह आरोप लगाते हुए एफआइआर दर्ज करा दी कि प्यारेलाल उस वक्त घर पर नहीं था।
लेकिन इसके बाद इस मामले में कुछ नहीं हुआ और 30 जून 1998 को केस बंद हो गया। लेकिन यह केस तीन वर्ष बाद 2001 को वापस से खुला था। जिसके बाद मंगलवार को इस केस में निर्णय सुनाया गया है।