देश आजादी का 75वां वर्षगांठ मना रहा है। ये आजादी हमें असंख्य वीरों के साहस और त्याग से मिली है। देश के विभाजन के समय की कहानियां आज भी रौंगटे खड़े कर देती है। राजस्थान भाजपा के विधायक वासुदेव देवनानी ने भी विभाजन के दंश को याद किया। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान के अस्तित्व में आने के बाद उनके परिवार के सदस्यों को सिंध छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने बताया कि तब उनके परिवार के सदस्यों ने कैसे दर्द और पीड़ा झेली थी।
मेरे नाना ने चना बेचकर परिवार का पेट पाला
उन्होंने कहा कि देश की विभाजन की भयावहता आज भी उन्हें और परिवार के अन्य सदस्यों को भावनात्मक रूप से परेशान करता है। उनके नाना का परिवार भारत नहीं आ सका और इस कारण उनसे सभी संबंध विभाजन के साथ खत्म हो गए। उनके दादा के पास सिंध में एक घर, जमीन और एक अच्छा व्यवसाय था लेकिन जब वे भारत आए तो उनके पास कुछ नहीं था। उन्होंने अजमेर में कागज के लिफाफे और चना बेचकर अपने परिवार का पेट पालना शुरू किया।
विभाजन का दंश आज भी चुभता है
भाजपा विधायक ने बताया कि मेरी अम्मा का परिवार सिन्ध के जकोकाबाद में रहता था। विभाजन की त्रासदी में मेरे नाना और मामा वहीं रह गए। अपने घर और जड़ों के बीच रहकर भी उन्हें वर्षों तक अपमान सहने पड़ा। हमारे परिवार को विभाजन का दंश आज भी टीस बनकर चुभता है ।मैंने धार्मिक विभाजन का दंश झेलने वाले मेरे मां बाबा से बंटवारे का संघर्ष बचपन में सुना था। जिसको याद करने पर आज भी मेरे रोंगटे खड़े हो जातें है। देवनानी ने यह भी कहा कि संघ के कई स्वयंसेवकों ने विभाजन के दौरान विस्थापित शिविरों में आवास, भोजन और दवा उपलब्ध कराने में मदद की।