राजस्थान का स्वास्थ्य विभाग मलेरिया के मामले में संवेदनशील इलाकों में मलेरिया नियंत्रण के लिए तरह—तरह के जतन कर रहा हैं। इन दिनों मच्छर मारने के लिए मेडिकेटेड़ जाली के उपयोग की सार्थकता का परीक्षण चल रहा है।
यह पायलट प्रोजेक्ट कोटा के मंडाना गांव में शुरु किया गया है। सफल रहा तो अन्य क्षेत्रों में भी मच्छर मारने की ये तकनीक अपनाई जा सकती है। डब्ल्यूएचओ द्वारा चलाए जा रहे नेशनल वेक्टर वार्न डिजिज प्रोग्राम के तहत कोटा जिले को 9300 जालियां मिली हैं। ये जालियां सभी तरह के साइज में सिंगल, डबल और यहां तक की तीन—चार मेंबरों के लिए भी डिजाइन की गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार प्रति एक हजार की आबादी में एक या दो से मलेरिया रोगी सामने आना तय मानक से ज्यादा है। इसे एनुअल पेराक्साइड इंसीडेंस माना जाता है। कोटा में कई इलाके ऐसे हैं जहां एनुअल पेराक्साइड इंसीडेंस ज्यादा है, इनमें से एक मंडाना गांव भी है। कार्यवाह सीएमएचओ डॉ.आर.के. लवानिया का कहना है कि मंडाना में यह प्रोजेक्ट सफल रहा तो मेडिकेटेड जालियां अन्य क्षेत्रों में भी बंटवाई जाएगी।