एशिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील जयसमंद अब छलकने को है। इसके कैचमेंट में पानी का बहाव बढ़ता जा रहा है। इसके चलते गांव में पानी आ जाने पर वे टापू बन जाते हैं। यह स्थिति करीब 6 महीने तक बनी रहेगी। ऐसे में इन गांवों का जिला और उपखण्ड मुख्यालय से सीध सम्पर्क कट गया है।
अब इन गांवों तक पहुंचने का एकमात्र साधन नाव है। जानकारी के अनुसार, सलूम्बर उपखण्ड के मेवल क्षेत्र में मैथूड़ी पंचायत इससे सबसे अधिक प्रभावित है। इस पंचायत के गांव भैंसों का नामला के 22 और पायरी के 32 परिवार जलस्तर बढ़ने के साथ टापू में फंस गए हैं। इन दोनों गांवों में जाने वाला मार्ग अब डूब गया है। जब जलस्तर 27 फिट 6 इंच को छू लेगा तो गांव में पानी का स्तर 6 फीट के करीब आ जाएगा।
वर्तमान में इन गांवों के पुरुष जान जोखिम में डाल 350 मीटर की जोखिम भरी दूरी को पार कर रहे हैं। वहीं, महिलाएं व बच्चे गांव से बाहर नहीं आ पा रहे हैं। इधर, बिजली नहीं होने से अंधेरे में चिमनी की सहायता से जीवन यापन कर रहे हैं। ग्रामीणों के लिए नियमित जीवन चलाने का भी संकट खड़ा है।