लोकसेवकों के खिलाफ केस करने से पहले अब राज्य सरकार से अनुमति लेनी होगी। अदालतें भी ऐसे परिवादो को जांच के लिए तब तक नहीं भेज सकेगी, जब तक सक्षम अधिकारी द्वारा अभियोजन स्वीकृति जारी नहीं की गई हो।
इसके लिए राज्य सरकार ने सीआरपीसी की धारा 197 में संशोधन किया है। संशोधन के अनुसार अब किसी भी लोक सेवक, जज या मजिस्ट्रेट के खिलाफ केस करने से पहले संबंधित सक्षम अधिकारी से अभियोजन स्वीकृति ली जाएगी। सक्षम अधिकारी के 6 माह में स्वीकृति जारी नहीं करने पर स्वीकृति स्वतः जारी होना माना जाएगा। हालांकि, यह प्रावधान उस स्थिति में ही लागू रहेगा जब किसी लोकसेवक ने अपने पदीय कर्तव्य के निर्वहन में कोई कार्य किया हो।