फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मैं गरीब हूं, मामले में सरकार की सफाई, नहीं दिए ऐसा लिखने के आदेश

Thu, 22 Jun 2017 08:48 PM IST
अमर उजाला टीम डिजिटल/जयपुर
विज्ञापन
राजेन्द्र राठौड़
विज्ञापन
राजस्थान के दौसा जिले में बीपीएल परिवारों के घरों की बाहरी दीवार पर 'मैं गरीब हूं' लिखने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। अब सरकार ने सफाई दी है कि सरकार ने कलक्टरों को घरों के बाहर एेसा लिखने के कोई आदेश जारी नहीं किए हैं।
विज्ञापन


ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि किसी जिला कलक्टर ने इस तरह के आदेश जारी किए हैं तो इसकी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि गरीब बीपीएल परिवारों को सही लाभ देने के लिए तत्कालीन सरकार ने 6 अगस्त 2009 और 6 जुलाई 2011 को बीपीएल परिवार का नाम व क्रमांक संख्या लिखने के आदेश जारी किए थे।

उन्होंने बताया कि बीपीएल सूची 2002 की शिकायत थी कि धनवान लोगों का बीपीएल सूची में चयन हो गया है। इसी उद्देश्य को लेकर बीपीएल परिवारों के घरों पर लाभार्थी का नाम व बीपीएल क्रमांक लिखने के निर्देश दिए गए थे, जिससे वास्तविक बीपीएल को इसका लाभ मिल सके।
विज्ञापन
विज्ञापन

समाज में उठानी पड़ रही थी शर्मिंदगी

घर के बाहर ये लिखा - फोटो : amar ujala
ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने कहा कि कि राज्य सरकार गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों का विकास करने के लिए पूरी तरह कटिबद्ध है।

गौरतलब है कि अमर उजाला ने 'गरीबी का ऐसा मजाक, मैं गरीब हूं' शीर्षक के जरिये समाचार प्रसारित कर मामले को उजागर किया था। जिसमें बताया गया था कि राजस्थान की राजधानी जयपुर से केवल 60 किलोमीटर दूर ही दौसा जिले में ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां गरीबों की गरीबी ही उनके सामाजिक जीवन पर अभिशाप साबित हो रही है।

यहां के करीब पचास हजार परिवार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून(एनएफएसए) के तहत राशन और अन्य सामग्री—सुविधाओं का लाभ लेने के लिए बीपीएल की सूची में शामिल है।

इसके लिए यहां प्रशासन की ओर से इन परिवार के घरों के बाहर बाकायदा पीले रंग से चौखाना पुतवाकर उसमें साफ—साफ ये लिखवाया गया है कि 'मैं गरीब परिवार से हूं और एनएफएसए से गेहूं लेता हूं।' ऐसे हालात के चलते अब ये बीपीएल में सूची में आने वाले लोग समाज में शर्मिंदगी महसूस कर रहे हैं।

यहां तक कि कई उच्च वर्ग के लोग तो इन लोगों को इस लिखावट के कारण ही हेय दृष्टि से देखते हैं और दया का भाव रखते हैं। जबकि, इस सम्बंध में अधिकारियों का कहना था कि बीपीएल परिवारों के घरों के बाहर पात्र और अपात्र लोगों में भेद करने के लिए लिखावट की गई है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें