राजस्थान हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव, वक्फ बोर्ड और बोर्ड के चेयरमैन अबुबकर नकवी, सदस्य अफरोद जैदी और नीदा खान को नोटिस जारी कर पूछा है कि वक्फ बोर्ड में अपात्रों को कैसे नियुक्त किया गया है। न्यायाधीश मनीष भंडारी की एकलपीठ ने यह आदेश सैय्यद नजीर हसन व अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
याचिका में कहा गया कि राज्य सरकार ने गत वर्ष 9 मार्च को अबुबकर नकवी को वक्फ बोर्ड में चेयरमैन व अफरोद जैदी और नीदा खान को वक्फ बोर्ड में सदस्य बनाया। जबकि वे वक्फ अधिनियम, 1995 के तहत तय पात्रता नहीं रखते हैं। अबुबकर की ओर से भेजे गए अपने बायोडाटा में कहा गया कि वह कई सालों से भाजपा का कार्यकर्ता है और उसने मुख्यमंत्री के लिए काम किया है। इससे पहले वे स्कूल में पीटीआई के पद पर कार्यरत थे। याचिका में कहा गया कि अधिनियम की धारा 14 में बोर्ड के पदाधिकारियों के लिए पात्रता तय है।
अधिनियम के अनुसार सदस्यों के लिए मुस्लिम स्कॉलर होना जरूरी है। जबकि दोनों सदस्य मुस्लिम स्कॉलर की पात्रता नहीं रखते हैं। वहीं चेयरमैन नकवी का चयन समाज सेवा, वित्त, राजस्व, कृषि या टाउन प्लानर की विशेषज्ञता रखने के वर्ग में किया गया है। जबकि बायोडेटा के अनुसार वे सिर्फ बीजेपी कार्यकर्ता ही रहे हैं। ऐसे में तीनों पदाधिकारियों को पात्रता नहीं होने के बावजूद भी बोर्ड में नियुक्त किया गया है। याचिका में गुहार की गई है कि तीनों की सदस्यता को रद्द किया जाए।
जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने संबंधित अधिकारियों सहित बोर्ड चेयरमैन और सदस्यों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।