दो दिन पूर्व जयपुर में स्थित झालाना वन क्षेत्र से शहर में आया एक लेपर्ड परिवार देशभर के अखबारों में छाया रहा। हालांकि अभी तक यह परिवार कुलिश स्मृति वन में ही जमा हुआ हैं। बुधवार को मुख्यमंत्री के बजट पिटारे से जब लेपर्ड प्रोजेक्ट की घोषणा हुई, तो सबसे जहन में इसी लेपर्ड परिवार यादें ताजा हो गईं। हालांकि बाद में मुख्यमंत्री राजे ने स्पष्ट किया कि इस प्रोजेक्ट की घोषणा का जयपुर शहर में आए लेपर्ड परिवार से कोई ताल्लुक नहीं है।
गौरतलब है झालाना वन क्षेत्र से कई बार लेपर्ड शहर की तरफ आ जाते है। माना जा रहा है कि इस प्रोजेक्ट के क्रियान्वयन के बाद शायद तेंदुओं का शहर में आना थम जाए। जानकारी के अनुसार अपने तरह के इस अनूठे प्रोजेक्ट के लिए सात करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। इस प्रोजक्ट के अंतर्गत राज्य में करीब 500 की संख्या में रहने वाले तेंदुओं का संरक्षण किया जाएगा। इसमें प्रमुख रुप से इंसान और इस खूबसूरत जानवर के बीच तालमेल कैसे हो इस पर ध्यान दिया जाएगा।
एक रिपोर्ट के अनुसार देशभर में लेपर्ड की संख्या करीब 14 हजार है। जहां तकक लेपर्ड के संरक्षण से सबंधित किसी प्रोजेक्ट का सवाल है तो देश में स्नो लेपर्ड के लिए प्रोजेक्ट चल रहा है। हालांकि राजस्थान में भी एक बार पहले भी पाली के जवाई में लेपर्ड प्रोजेक्ट की बात चली थी। लेकिन योजना अमलीजामा नहीं पहन सकी।