सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश अरुण मिश्रा ने कहा है कि लव और वॉर में सब जायज है, लेकिन यह बात वकालत में लागू नहीं हो सकती। खासतौर पर युवा वकीलों को येन-केन केस जीतने के बजाए प्रोफेशनल एथिक्स पर ध्यान देना चाहिए।
न्यायाधीश मिश्रा बार कौंसिल ऑफ राजस्थान की ओर से आज ओटीएस में एमबीएल भार्गव स्मृति व्याख्यान में संबोधित कर रहे थे। वकीलों के एथिक्स और पक्षकारों के अधिकार पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि बैंच हटिंग करना आम हो गया है, लेकिन वकील अपने रिश्तेदार की अदालत में ही पैरवी नहीं करे या उस पूरी कोर्ट में, यह विचार का विषय हो सकता है। आज बार कौंसिल में शिकायत होने पर दोषी वकील का वोट नहीं मिलने के डर के कारण उस पर कार्रवाई नहीं की जा रही है। बार कौंसिल ऑफ इंडिया एक बार प्रस्ताव पारित कर, कुछ दिन बाद दबाव में आकर उसे वापस ले लेती है। उन्होंने कहा कि बड़े लोग छोटों को रुला रहे हैं, इसे रोकने के लिए वकीलों को आगे आना चाहिए।